Bhaiya (Bhai) Dooj : Never be hurled into Hell

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Bhai Dooj, Yam Dwitiya: Sat, 25 October 2014

Bhai Duj Tika Muhurta
13:11 to 15:24

Bhaiya Dooj (भय्या दूज), comes once a year after diwali on second day of bright fortnight of kartik (this year Sat, 25 Oct 2014). The sister applies the tikka on the brother’s forehead. The Puja is usually performed in the mother’s house before the brothers leave for work or study.

Bhai Duj is also called 'Yama Dwiteeya' as it's believed that on this day, Yamaraj, the Lord of Death and the Custodian of Hell, visits his sister Goddess Yamuna, who puts the auspicious mark on his forehead and prays for his well being. So it's held that anyone who receives a Tilak from his sister on this day would never be hurled into hell.

According to one legend, on this day, Lord Krishna, after slaying the Narakasura demon, goes to his sister Subhadra who welcomes Him the lamp, flowers and sweets, and puts the holy protective spot on her brother's forehead.

Bhaiya Dooj is a day dedicated to sisters. We have heard about Raksha Bandhan (brothers day). Well this is sister’s day, that anyone who receives tilak from his sister on this day will never be thrown.
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Govardhan Puja or Annakut : Fri, 24 Oct 2014

Govardhan Puja, Annakut : Fri, 24 October 2014
Govardhan Puja Muhurta: 3.25 pm to 5.38 pm

The day after Deepawali is celebrated as Govardhan Puja (गोवर्धन पूजा). This year, Fri, 24 October 2014, when Mount Govardhan, near Mathura, is worshipped. Pious people keep awake the whole night and cook 56 (or 108) different types of food for the bhog (भोग - the offering of food) to Krishna. This ceremony is called annkut (अन्‍नकूट) which means a mountain of food. Various types of food – cereals, pulses, fruit, vegetables, chutneys, pickles, and salads – are offered to the Deity and then distributed as prasada to devotees. This festival is in commemoration of the lifting of Mount Govardhan by Lord Krishna.

According to a legend, before Krishna was born, Indra, the god of Rain, was the chief deity of Vraj. Then Krishna instigated the people to stop worshipping Indra. Indra wanted to show his power over Krishna and brought about a cloud-burst which flooded the countryside for many days. People were afraid that the downpor was a result of their neglect of Indra. But Krishna assured them that no harm would befall them. He lifted Mount Govardhan with his little finger and sheltered men and beasts from the rain. This gave him the epithet Govardhandhari. After this, Indra accepted the supremacy of Krishna.



In the temples in Mathura and Nathadwara, the idols of the deities are given milk bath, are dressed in shining attires with lots of ornaments. After the offering of prayers, sweets are raised in the form of a mountain before the deities as 'Bhog' and after that the devotees approach the mountain of Food in order to take prasad from it.

According to the Vedic scriptures Giri Govardhan is greater than even the transcendental kingdom of Vaikuntha (बैकुण्ठ) , the eternal abode of Lord Vishnu.


|| श्रीगिर्रिराज धरण प्रभु तेरी शरण ||
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15 Ka Yantra on Diwali - Get Rid Of Debt and Poverty


लक्ष्मी पूजन में पंद्रह के यन्त्र का विशेष महत्व है । यह यन्त्र ऋण व दरिद्रता का नाश करके अन्न धन व्यापार की वृद्धि करने वाला है । इस यन्त्र को लक्ष्मी पूजन से पहले अपने घर के दरवाजे या दूकान के दरवाजे के दोनों और सिन्दूर हल्दी घी मिश्रित घोल से लिखना चाहिये । 


यन्त्र लिखने का शुभ मुहूर्त - १२:०५ - १:२९ 
(दोपहर २३ Oct )
  (पंडित की कोई आवश्यकता नहीं है )

ब्राह्मण , क्षत्रिय , वैश्य एवं शूद्र - सभी के लिए यन्त्र का नंबर अलग अलग है । 


ब्राह्मणो एवं पंडितो के लिए 



८ 


१ 
६ 


३ 


५ 
७ 


४ 


९ 
२ 


क्षत्रियों के लिए 


४ 


३ 
८ 


९  


५ 
१ 


२ 


७ 
६ 


वैश्य व व्यापारियों के लिए 


२ 


९ 
४ 


७ 


५ 
३ 


६ 


१ 
८ 


शूद्रों के लिए 



६ 


७  
२ 


१ 


५ 
९ 


८ 


३ 
४ 



नोट : अपने कर्म के हिसाब से ही यन्त्र बनायें । ब्राह्मण अगर व्यापार कर रहा है तो वैश्य वाला यन्त्र बनाये । 
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Chaughadia Muhurat - Auspicious Time for Laxmi Pujan @ Home & Offices


श्रीमहालक्ष्मी पूजन एवं दीपावली का महापर्व कार्तिक कृष्ण अमावस में प्रदोष काल एवं अर्धरात्रि व्यापिनि हो, तो विशेष रुप से शुभ होती है ।

लक्ष्मी पूजन, दीपदानादि के लिये प्रदोषकाल ही विशेषतया प्रश्स्त माना गया है-
कार्तिके प्रदोषे तु विशेषेण अमावस्या निशावर्धके ।

तस्यां सम्पूज्येत्‌ देवीं भोगमोक्षं प्रदायिनीम ॥ (भविष्य पुराण)

अपने नगर के सूर्यास्त के समय से २.२४ मिनट तक का समय प्रदोष काल कहलाता है। अगर सूर्यास्त ६ बजे का है तो प्रदोष काल ८.२४ तक का होगा । कहीं कहीं ८-१२ मिनट का अन्तर आ सकता है, उसके लिये उचित होगा आप प्रदोष काल में १५ मिनट अन्तर रखें। जैसे ६ बजे को ६.१५ माने ८.२४ को ८.०९ ।

लो !! निकल आया लक्ष्मी पूजा मुहूर्त ।

Laxmi - Dipmala Pujan 2014 : Thu, 23 October

Pradosh Kal: 17:39 to 20:14 (Delhi,India) 

स्थिर लग्न प्रदोष काल के साथ हो तो अति शुभ होगा । भारत में वृष लग्न प्रदोष काल बेला में उपस्थित है ।

दिल्ली में 18:56 से 20:52 तक वृष लग्न होगा ।

17:40 से 19:16 मिं तक रात्रि की Amrit Chaughadia भी रहेंगी।


Most Auspicious for Deepotsav & MahaLakshmi Pujan
18:56 to 20:14

Auspicious for Yantra-Tantra-Mantra Sadhana
23:39 to 24:31+

सिंह लग्न : 25:27+ to 27:44+ (i.e midnight 1.27 am to 3.44 am) 


व्यापारिक प्रतिष्ठानों में लक्ष्मी पूजा के लिए उत्तम समय |

Laabh Ki Chaughadia (दिन) : 12:05 PM to 01:29 PM

Shubh Chaughadia (दिन ) : 04:16 PM to 05:40 PM

Amrit Chaughadia (दिन ) : 01:29 PM to 02:53 PM

कर्ज में डूबे अथवा घाटे में चल रहे व्यापारी कुम्भ लग्न में लक्ष्मी पूजन करें तो लाभ होगा । 
Kumbh Sthir Lagna: 02:29 pm to 03:56 pm 

15 Ka Yantra - Get Rid of Debt

DIWALI PUJAN DATE USA, CANADA: WED, 22 OCTOBER 2014

देव-मंदिर दर्शन, दीपावली बधाईयां, भेंट, स्नान, दान आदि कार्य आप अमावस्या तिथि (२३ अक्टूबर २०१४ ) में करें ।
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The Most Auspicious Time for Lakshmi Puja on Diwali

प्रस्तुत वर्ष दीपावली का पर्व  Thu, 23 October 2014 की अमावस एवं चित्रा नक्षत्र योग मे होगा।

दीपावली मे अमावस तिथि, प्रदोष, निशीथ एवं महानीशीथ काल तथा तुला का सुर्य वा तुला का चंद्रमा विशेष महत्वपूर्ण माने जाते हैं।


Diwali (Laxmi Puja) Muhurta 2014


प्रदोष काल - अपने नगर के सुर्यास्त से लेकर 2 घन्टे 40 मिनट तक का समय | अर्थात Delhi (India) मे प्रदोष काल सांय सुर्य अस्त (17:39) से शुरू होकर रात 8 बजकर 14 मिनट (20:14) तक रहेगा। Delhi मे स्थिर लग्न (वृष) की व्याप्ति रात्रि 18:56 से 20:52 बजे तक रहेगी।

Amrit Choghadia (Ratri) : 17:40 to 19:16

अतेव सांय 18:56 बजे से रात 20:14 तक का प्रदोष काल विशेष रूप से श्री गणेश, श्री महालक्ष्मी पूजन, कुबेर पूजन, बसना अर्थात Accounts Books बही खातो का पूजन, दीपदान, अपने आश्रितों को Sweets, Gifts आदि बांटना तथा धर्मस्थलो पर दानादि करना कल्याणकारी होगा।

निशीथ काल (Nisheetha Kaal) में श्री महालक्ष्मी पूजन, नवग्रह पूजन, स्तोत्र, काम्य मन्तरों के जपानुष्ठान तथा ब्रह्मणो को यथा शक्ति वस्तर (cloth), फल, अनाज धन आदि का दान करना शुभ होता है।

Mahanisheetha Kaal ( कर्क लग्न युक्‍त ): 23.39 to 24:31+ (Midnignt) 
दीपावली पूजन महानिशीथकाल में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है, जिसमें पूजन शास्तरोक्त विधि अनुसार करना अनिवार्य है। महानिशीथकाल में मुख्यतः तांत्रिक , ज्योतिषविद, वेद्पाठी, विद्वान, ब्राह्मण, अघोरी, विधिवत, यंत्र मंत्र तंत्र द्वारा, विभिन्न शक्तियों का पूजन करते हैं एवं उनका आवाहान करते हैं।

सिंह लग्न : 25:27+ to 27:44+

Chaughadia Muhurat for Businesses (India)

LAXMI PUJA DATE FOR USA, CANADA
 22 OCTOBER 2014

1. इस वर्ष अमावस, प्रदोष काल  एवं वृष लग्न का विशेष महत्व रहेगा तथा यथासंभव इस काल में पूजन प्रारंभ कर लेना चाहिए |

2. निशीथ काल में श्रीसूक्त, कनकधारा स्तोत्र एवं लक्ष्मी स्तोत्र आदि मंत्रो का जपानुष्ठान करें |

3. महानिशीथ काल में तंत्र-मंत्र-यन्त्र एवं याज्ञिक क्रिया का संपादन करें |


P.S: Time is believed to be correct. 

दीपावली पूजन के पश्चात गृह में एक चौमुखा दीपक रात भर जलता रहना लक्ष्मी एवं सौभाग्य में वृध्दि का प्रतीक माना जाता है।



|| Happy Diwali 2014 ||

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