घर पर दुर्गा पूजा करने की संपूर्ण विधि: एक चरण-दर-चरण मार्गदर्शिका
मां दुर्गा की पूजा करना भारतीय संस्कृति और आध्यात्म का एक अभिन्न अंग है, जो शक्ति और भक्ति का प्रतीक है। क्या आपने कभी सोचा है कि घर पर ही इस पवित्र अनुष्ठान को विधिवत कैसे संपन्न किया जाए? चिंता न करें! यह मार्गदर्शिका आपको दुर्गा पूजा के प्रत्येक चरण से अवगत कराएगी, जिससे आप पूरी श्रद्धा और सही विधि के साथ मां भगवती की आराधना कर सकें। यह सिर्फ एक पूजा नहीं, बल्कि मां के साथ एक गहरा आध्यात्मिक संबंध बनाने का अवसर है।
किसी भी शुभ कार्य का आरंभ शुद्धिकरण से होता है। सर्वप्रथम, आपको 'कलश पूजा' या 'घटस्थापना' करनी होगी, जो पूजा स्थल को पवित्र करती है और देवताओं का आह्वान करती है। इसके पश्चात, अपने आप को आंतरिक रूप से शुद्ध करने के लिए 'आत्म पूजा' करें।
इसके लिए, निम्नलिखित मंत्र का जाप करते हुए स्वयं को पवित्र करें:
ओम अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा, यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः। (अर्थ: जो भी कमललोचन भगवान विष्णु का स्मरण करता है, वह भीतर और बाहर से पवित्र हो जाता है)। आत्म-शुद्धि के बाद, अपने माथे पर 'तिलक' लगाएं, जो एकाग्रता और शुभता का प्रतीक है।
अगला महत्वपूर्ण चरण 'आचमन' है, जिसमें आप अपने हाथ की हथेली में पवित्र जल लेकर ग्रहण करते हैं। यह क्रिया वाणी, मन और कर्म से किए गए पापों को धोने में सहायक मानी जाती है। आचमन के लिए इस मंत्र का जाप करें:
ओम केशवाय नमः, ओम नारायणाय नमः, ओम माधवाय नमः, ओम गोविंदाय नमः। (अर्थ: मैं केशव को प्रणाम करता हूँ, मैं नारायण को प्रणाम करता हूँ, मैं माधव को प्रणाम करता हूँ, मैं गोविंद को प्रणाम करता हूँ)।
इसके उपरांत, आपको 'संकल्प' लेना होता है। यह पूजा के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए एक दृढ़ निश्चय है। जल को हाथ में लेकर अपनी मनोकामना व्यक्त करते हुए संकल्प लें।
अब मां दुर्गा का 'आवाहन' करने का समय है। पूरे भक्तिभाव से मां को अपने पूजा स्थल पर विराजने के लिए आमंत्रित करें। आवाहन मंत्र इस प्रकार है:
आगच्छ त्वं महादेवि ! स्थाने चात्र स्थिरा भव। यावत् पूजां करिष्यामि तावत् त्वं सन्निधो भव। श्री जगदंबायै दुर्गादेव्यै नमः। दुर्गादेवीमावाहयामि। आवाहनार्थे पुष्पांजलिं समर्पयामि। (मां दुर्गा को फूल अर्पित करें)।
आवाहन के बाद, ध्यान और मंत्रों के साथ 'आसन' अर्पित करें। मंत्र है: ओम सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके, शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते। श्री जगदंबायै दुर्गादेव्यै नमः। आसनार्थे पुष्पानि समर्पयामि। (फूल अर्पित करें)।
फिर, 'पाद्य' अर्पित करें: श्री जगदंबायै दुर्गादेव्यै नमः। पादयोः पाद्यं समर्पयामि। (मां के श्री चरणों में जल अर्पित करें)।
इसके बाद 'अर्घ्य' दें: श्री जगदंबायै दुर्गादेव्यै नमः। हस्तयोः अर्घ्यं समर्पयामि। (चंदन, पुष्प और अक्षत मिश्रित जल अर्पित करें)। अंत में, 'आचमन' कराएं: श्री जगदंबायै दुर्गादेव्यै नमः। आचमनं समर्पयामि। (कपूर मिश्रित जल अर्पित करें)।
अब मां को स्नान कराने की बारी है। सर्वप्रथम 'स्नान' के लिए जल अर्पित करें: श्री जगदंबायै दुर्गादेव्यै नमः स्नानांतं जलं समर्पयामि। (स्नान के लिए गंगाजल अर्पित करें)। स्नान के पश्चात एक बार फिर 'स्नानांग आचमन' कराएं: स्नानांते पुनराचमनीयं जलं समर्पयामि। इसके बाद, 'दुग्ध स्नान' कराएं: श्री जगदंबायै दुर्गादेव्यै नमः दुग्धस्नानं समर्पयामि। (गाय का दूध स्नान के लिए अर्पित करें)। तत्पश्चात, 'दधि स्नान' कराएं: श्री जगदंबायै दुर्गादेव्यै नमः दधिस्नानं समर्पयामि। (गाय के दूध से बना दही स्नान के लिए अर्पित करें)। ये सभी क्रियाएं मां के प्रति हमारी सेवा और सम्मान को दर्शाती हैं।
श्रद्धापूर्वक मां को विभिन्न सुगंधित और पवित्र द्रव्यों से स्नान कराएं। पहले 'घृत स्नान' कराएं: श्री जगदंबायै दुर्गादेव्यै नमः घृतस्नानं समर्पयामि। (गाय का घी स्नान के लिए अर्पित करें)। फिर 'मधु स्नान': श्री जगदंबायै दुर्गादेव्यै नमः मधुस्नानं समर्पयामि। (शहद स्नान के लिए अर्पित करें)। इसके बाद 'शर्करा स्नान': श्री जगदंबायै दुर्गादेव्यै नमः शर्करास्नानं समर्पयामि। (चीनी स्नान के लिए अर्पित करें)। इन सभी द्रव्यों का उपयोग मां को शीतलता और पवित्रता प्रदान करने के लिए किया जाता है। फिर, इन सभी द्रव्यों के मिश्रण, यानी 'पंचामृत स्नान' कराएं: श्री जगदंबायै दुर्गादेव्यै नमः पंचामृतस्नानं समर्पयामि। (पंचामृत स्नान के लिए अर्पित करें)।
अब 'गंधोदक स्नान' का समय है: श्री जगदंबायै दुर्गादेव्यै नमः गंधोदकस्नानं समर्पयामि। (मलया चंदन और अगरु मिश्रित जल स्नान के लिए अर्पित करें)। इसके बाद 'शुद्धोदक स्नान' कराएं: श्री जगदंबायै दुर्गादेव्यै नमः शुद्धोदकस्नानं समर्पयामि। (पवित्र जल अंतिम स्नान के लिए अर्पित करें)। शुद्धोदक स्नान के बाद 'आचमन' कराएं: शुद्धोदकस्नानांते आचमनीयं जलं समर्पयामि।
अब मां को 'वस्त्र' अर्पित करें: श्री जगदंबायै दुर्गादेव्यै नमः वस्त्रोपवस्त्रं कंचुकीयम् च समर्पयामि। (साड़ी और अन्य वस्त्र सामग्री अर्पित करें)। वस्त्र पहनाने के बाद फिर से 'आचमन' कराएं: वस्त्रांते आचमनीयं जलं समर्पयामि।
श्रृंगार के बिना पूजा अधूरी है। मां को 'सौभाग्य सूत्र' अर्पित करें: श्री जगदंबायै दुर्गादेव्यै नमः सौभाग्यसूत्रं समर्पयामि। फिर 'चंदन' लगाएं: श्री जगदंबायै दुर्गादेव्यै नमः चंदनं समर्पयामि। 'हरिद्राचूर्ण' (हल्दी) अर्पित करें: श्री जगदंबायै दुर्गादेव्यै नमः हरिद्रां समर्पयामि। 'कुंकुम' लगाएं: श्री जगदंबायै दुर्गादेव्यै नमः कुंकुमं समर्पयामि। 'सिंदूर' अर्पित करें: श्री जगदंबायै दुर्गादेव्यै नमः सिंदूरं समर्पयामि। 'काजल' लगाएं: श्री जगदंबायै दुर्गादेव्यै नमः कज्जलं समर्पयामि। 'दूर्वांकुर' (दूर्वा) अर्पित करें: श्री जगदंबायै दुर्गादेव्यै नमः दूर्वांकुरान् समर्पयामि। 'बिल्वपत्र' चढ़ाएं: श्री जगदंबायै दुर्गादेव्यै नमः बिल्वपत्रं समर्पयामि। 'आभूषण' अर्पित करें: श्री जगदंबायै दुर्गादेव्यै नमः आभूषणानि समर्पयामि। 'पुष्पमाला' चढ़ाएं: श्री जगदंबायै दुर्गादेव्यै नमः पुष्पमालां समर्पयामि। 'नानपरिमलद्रव्य' (विभिन्न सुगंधित द्रव्य) अर्पित करें: श्री जगदंबायै दुर्गादेव्यै नमः नानपरिमलद्रव्याणि समर्पयामि। 'सौभाग्य पटिका' अर्पित करें: श्री जगदंबायै दुर्गादेव्यै नमः सौभाग्यपटिकां समर्पयामि।
फिर 'धूप' दिखाएं: श्री जगदंबायै दुर्गादेव्यै नमः धूपमाघ्रापयामि। और 'दीप' दिखाएं: श्री जगदंबायै दुर्गादेव्यै नमः दीपं दर्शयामि। (मां को दीपक दिखाएं और अपने हाथ धो लें)।
अब 'नैवेद्य' (भोग) अर्पित करें: श्री जगदंबायै दुर्गादेव्यै नमः नैवेद्यं निवेदयामि। (आचमन भी कराएं)। फिर 'ऋतुफल' (मौसमी फल) अर्पित करें: श्री जगदंबायै दुर्गादेव्यै नमः ऋतुफलानि समर्पयामि। 'तांबूल' (पान) अर्पित करें: श्री जगदंबायै दुर्गादेव्यै नमः तांबूलं समर्पयामि। और 'दक्षिणा' दें: श्री जगदंबायै दुर्गादेव्यै नमः दक्षिणां समर्पयामि।
इसके बाद, 'आरती' करें: श्री जगदंबायै दुर्गादेव्यै नमः कर्पूरार्तिक्यं समर्पयामि। श्री अंबाजी की आरती, जय अम्बे गौरी दुर्गा आरती गाएं।
आरती के बाद 'प्रदक्षिणा' करें: श्री जगदंबायै दुर्गादेव्यै नमः प्रदक्षिणां समर्पयामि।
अंत में 'मंत्र पुष्पांजलि' अर्पित करें, जिसमें विभिन्न मंत्रों का जाप करते हुए फूल चढ़ाए जाते हैं:
ओम यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवास्तानि धर्मानि प्रथमान्यासन। ते ह नाकं महिमानः सचन्त यत्र पूर्वे साध्याः सन्ति देवाः। ओम कात्यायन्यै विद्महे कन्याकुमार्यै धीमहि, तन्नो दुर्गा प्रचोदयात्। ओम वक्रतुण्डाय विद्महे एकदन्ताय धीमहि, तन्नो दन्ति प्रचोदयात्। ओम नाना सुगंधि पुष्पाणि ऋतु कालो भवानि च, पुष्पांजलि मर्यादत्त गृहान परमेश्वरी।
पूजा के समापन पर, मां को 'नमस्कार' करें: या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः। श्री जगदंबायै दुर्गादेव्यै नमः नमस्कारान् समर्पयामि।
इसके पश्चात, 'क्षमा याचना' करें, क्योंकि मनुष्य से त्रुटियां हो सकती हैं: आवाहनं न जानामि न जानामि तव अर्चनम्, पूजां च न जानामि क्षमस्व परमेश्वरी। मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरी, यत्पूजितं मया देवि परिपूर्णं तदस्तु मे। श्री जगदंबायै दुर्गादेव्यै नमः क्षमायाचनं समर्पयामि।
अंत में, अपनी संपूर्ण पूजा को मां को 'अर्पण' करें: औं तत्सद ब्रह्मार्पणमस्तु, विष्णवे नमः, विष्णवे नमः, विष्णवे नमः।
इस प्रकार, आप पूर्ण विधि-विधान से मां दुर्गा की पूजा कर सकते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। यह मार्गदर्शिका आपको मां की असीम कृपा प्राप्त करने में सहायक होगी।
Step-wise direction to perform Durga Puja
OM YAGYEN YAGYA MAYA JANT DEVAASTAANI DHARMAANI PRATHMAA NYAASAN. THE NAAKAM MAHIMAANAH SACHANT YATRA POORVEY SAADHYAH SANTI DEVAAH.OM KATYAYANYAI VIDMAHE KANYAKUMARYAI DHEEMAHI, TANNO DURGA PRACHODAYAT.OM VAKRA TUNDAAYE VIDMAEHEY EK DAN TAAYE DHEE MAHI, TANNO DANTI PRACHO DAYAAT.OM NAA NAA SUGANDHI PUSHPAANI RITU KAALO BHAWAANEE CHA, PUSHPAANJALI MARYAADATTA GRIHAAN PARMESHWARI.
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