Ganga Mahaotsav is a 5-day festival, held on the banks of Ganga in Varanasi, is celebrated every year from Prabodhani Ekadashi to Kartik Purnima (This year from 10 Nov 2016 to 14 Nov 2016*). The festival celebrates the rich cultural heritage of Varanasi.

The event also coincides with Dev Deepawali the festival of lights at Varanasi. On Dev Deepavali (full moon day) it is said that God descends from heaven to bathe in the Ganga. On this occasion amidst chanting of Vedic hymns people light diyas (earthen lamps) and burst firecrackers in welcome.


* Kartik Purnima - Dev Deepavali : Mon, 14 November 2016

Tulsi Vivah on  Fri 11 November 2016

कार्तिक शुक्ल एकादशी को शालिग्राम और तुलसी का विवाह रचाया जाता है। मान्यता है कि कार्तिक मास में जो व्यक्ति तुलसी का विवाह भगवान विष्णु से रचाता है उसके पिछले जन्मों का पाप नष्ट हो जाता है।

Dev Prabodhini Ekadashi Vrat: Thu, 10 November 2016

Bhisma Panchak Starting 10 NOV 2016 to 14 NOV 2016

यह व्रत कार्तिक शुक्ल एकादशी से प्रारंभ होकर पूर्णिमा तक चलता है। कहा जाता है कि महाभारत काल में जब देवव्रत भीष्म सूर्य के उत्रायण होने की प्रतिक्छा में शर शय्या पर थे तो उनही पांच दिनों के दौरान उन्होने पांडवों को राज धर्म, वर्ण धर्म, मोक्छ धर्म आदि पर उपदेश दिया था। श्री कृष्ण ने उनकी स्मृति में भीष्म पंचक व्रत की आयोजना की।

Baikuntha Chaturdashi Vrat on Sat, 12 Nov 2016

भगवान शिव और विष्णु की पूजा करनी चाहिये

कार्तिक मास के शुक्ल पक्छ की चतुर्दशी को यह व्रत किया जाता है। ऐसी मान्यता है की निःसंतान लोग यदि रात्रि के समय किसी नदी या तीर्थ में पूरी रात्रि तक खडे होकर हाथों में दीपक जलाएं तो संतान की प्राप्ति होती है।

Kartika Purnima on Mon, 14 November 2016

कार्तिक पूर्णिमा पवित्र पुनीत पर्व है। इसमें किये गये यग्य, दान, स्नान, साधना का फल असीम होता है। उस दिन यदि कृतिका हो तो महाकार्तिकी होती है। इसी दिन सायंकाल के समय मतस्यावतार हुआ था। अत: इस दिन किये गये दान का फल दस यग्यों के फल के बराबर है। इस दिन हरिद्वार, काशी (Varanasi), प्रयाग (Allahabad), पुष्कर आदि पुण्य तिर्थों में श्रध्दापूर्वक स्नान, दान करने से महा पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
छठ पूजा - सूर्य षष्ठी

Chhath Puja (Chhathi Maiya Pujan)
Surya Shashthi Vrat : Sun, 6 November 2016

कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी को सूर्य षष्ठी का व्रत करने का विधान है । इसे करने वाली स्त्रियाँ धन-धान्य, पति-पुत्र तथा सुख-समृद्धि से परिपूर्ण रहती हैं। यह व्रत बडे नियम तथा निष्ठा से किया जाता है। इसमे तीन दिन के कठोर उपवास का विधान है । इस व्रत को करने वाली स्त्रियों को पंचमी को एक बार नमक रहित भोजन करना पडता है। षष्ठी को निर्जल रहकर व्रत करना पडता है । षष्ठी को अस्त होते हुए सूर्य को विधिपूर्वक पूजा करके अर्घ्य देते हैं। सप्तमी के दिन प्रात:काल नदी या तालाब पर जाकर स्नान करती हैं। सूर्योदय होते ही अर्घ्य देकर जल ग्रहण करके व्रत को खोलती हैं।

Women & Offerings


सूर्यषष्ठी-व्रतके अवसरपर सायंकालीन प्रथम अर्घ्यसे पूर्व मिट्टीकी प्रतिमा बनाकर षष्ठीदेवीका आवाहन एवं पूजन करते हैं। पुनः प्रातः अर्घ्यके पूर्व षष्ठीदेवीका पूजन कर विसर्जन कर देते हैं। मान्यता है कि पंचमीके सायंकालसे ही घरमें भगवती षष्ठीका आगमन हो जाता है। इस प्रकार भगवान्‌ सूर्यके इस पावन व्रतमें शक्ति और ब्रह्म दोनोंकी उपासनाका फल एक साथ प्राप्त होता है । इसीलिये लोकमें यह पर्व ‘सूर्यषष्ठी’ के नामसे विख्यात है।

सूर्यषष्ठी-व्रतके प्रसादमें ऋतु-फलके अतिरिक्त आटे और गुडसे शुद्ध घीमें बने ‘ठेकुआ’ का होना अनिवार्य है; ठेकुआपर लकडीके साँचेसे सूर्यभगवान्‌के रथका चक्र भी अंकित करना आवश्यक माना जाता है। इस व्रत का प्रसाद माँगकर खानेका विधान है।

दीवाली लक्ष्मी पूजन विधि – 


Quick and Easy Laxmi Puja @ Home

एक पट्टे पर लाल कपड़ा बिछाकर पट्टे को चारों ओर से कलावे से बांध दें। फिर इस पर हल्दी और आटे से एक अष्टदल कमल या श्री लक्ष्मी यंत्र बनाएं। पट्टे पर एक ओर लघु सूखा नारियल और दूसरी ओर दक्षिणावर्ती शंख स्थापित करें। पट्टे के नीचे दायीं ओर चावल की ढेरी पर एक कलश स्थापित करें। पूजा प्रारंभ करने से पूर्व साधक दुरात्माओं और आसुरी शक्तियों को भगाने के लिए चारों दिशाओं में राई या सरसों फेंकें तथा पवित्रीकरण मंत्र से अपने चारों ओर पवित्र जल से छींटे डालें।

हाथ में जल लेकर संकल्प मंत्र से पूजा का संकल्प लें।

मैं (अपना नाम बोलें), सुपुत्र श्री (पिता का नाम बोलें), जाति (अपनी जाति बोलें), गोत्र (गोत्र बोलें), पता (अपना पूरा पता बोलें) अपने परिजनो के साथ जीवन को समृध्दि से परिपूर्ण करने वाली माता महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिये कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या के दिन महालक्ष्मी पूजन कर रहा हूं। हे मां, कृपया मुझे धन, समृध्दि और ऐश्वर्य देने की कृपा करें। मेरे इस पूजन में स्थान देवता, नगर देवता, इष्ट देवता कुल देवता और गुरु देवता सहायक हों तथा मुझें सफलता प्रदान करें।

यह संकल्प पढकर हाथ में लिया हुआ जल, पुष्प और अक्षत आदि श्री गणेश-लछ्मी के समीप छोड दें।

वरुण (कलश) पूजनम 

वरुण देवता का आवाहन कर कलश पूजन करें |
पाद्यं समर्पयामि, अघ्र्य समर्पयामि, आचमनं समर्पयामि, पंचामृत स्नानं समर्पयामि, वस्त्रं समर्पयामि, पुश्प्मालाय्म समर्पयामि,धूपं दीपं द्रश्यमी,नवैध्येम निवेदयामि, ऋतुफलं समर्पयामि, दक्षिणाम समर्पयामि आदि मंत्र से षोडशोपचार पूजन करें।

इसके बाद हाथ जोड़ कर वरुण देवता को नमस्कार करें |

श्री गणपति पूजनम 

हाथ में चावल और फूल लेकर गणेशजी का अहवान करें|
ओम विनायकम मह्त्पुश्यम सर्वदेव नमस्कृतं सर्वविघ्नाहरम गौरीपुत्रं आवाहयाम |
हाथ के चावल और फूल गणेश जी पर छोड़ दें |

ध्यान :
गजाननं भूतगणादि सेवितं कपित्थ जम्बूफल चारु भक्षण्म्।
उमासुत शोकविनाशकं, नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम्।।
श्री मन्महागणाधिपतये नमः।

गणपति पूजन :
ओम गं गणपतये नम : स्नानं समर्पयामि
जल गणेश जी को स्नानं अर्पित करें
ओम गं गणपतये नम : वस्त्रं समर्पयामि
कलावा तोड़ कर अथवा वस्त्र गणेशजी को अर्पित करें
ओम गं गणपतये नम : यज्ञोपवीतं समर्पयामि
कलावा गणेश जी को अर्पित करें
ओम गं गणपतये नम : गन्धं समर्पयामि
इत्र गणेशजी को अर्पित करें
ओम गं गणपतये नम : पुश्प्मालाय्म समर्पयामि
गणेश जी को फूलमाला अर्पित करें
ओम गं गणपतये नम : धूपं दीपं द्रश्यमी
धूप दीप को हाथ से गणेशजी को दिखाएँ
ओम गं गणपतये नम : नवैध्येम निवेदयामि
मिष्ठान व खील बताशे , खिलोने गणेश को अर्पित करें
ओम गं गणपतये नम : ऋतुफलं समर्पयामि
फल गणेश जी को अर्पित करें
ओम गं गणपतये नम : ताम्बूलं पुन्गिफलम समर्पयामि
एक पान के पत्ते पर सुपारी इलायची लौंग रख कर गणेशजी को अर्पित करें
ओम गं गणपतये नम : दक्षिणाम समर्पयामि
यथायोग्य दक्षिणा अर्पित करें |

श्री गणेश पूजन के पश्चात षोडश मातृका एवं नवग्रहों का पूजन करें।

षोडश मातृका पूजन

पूजा कि थाल पर त्रिशूल अंकित करें | त्रिशूल पर अक्षत चढ़ाते हुए यह प्रार्थना करते हुए षोडश मातृकाओं का आवाहन व् नमस्कार करें |

बेग पधारो गेह मम , सोलह माता आप |
वश बढे पीड़ा कटे , मिटे शोक संताप ||
पाद्यं समर्पयामि, अघ्र्य समर्पयामि, आचमनं समर्पयामि, पंचामृत स्नानं समर्पयामि, वस्त्रं समर्पयामि, पुश्प्मालाय्म समर्पयामि,धूपं दीपं द्रश्यमी,नवैध्येम निवेदयामि, ऋतुफलं समर्पयामि, दक्षिणाम समर्पयामि आदि मंत्र से षोडश मातृकाओं का का षोडशोपचार पूजन करें और उनको नमस्कार करें |

नवग्रह पूजनम

अब पूजा कि थाल में कुमकुम कि नौ बिंदियों पर अक्षत अर्पित करते हुए नवग्रहो का आवाहन करें |
रवि शशि मंगल बुध गुरु , शुक्र शनि महाराज |
राहु केतु नव गृह नमो, सकल संवारो काज ||
पाद्यं समर्पयामि, अघ्र्य समर्पयामि, आचमनं समर्पयामि, पंचामृत स्नानं समर्पयामि, वस्त्रं समर्पयामि, पुश्प्मालाय्म समर्पयामि,धूपं दीपं द्रश्यमी,नवैध्येम निवेदयामि, ऋतुफलं समर्पयामि, दक्षिणाम समर्पयामि आदि मंत्र से नवग्रह देवताओ का षोडशोपचार पूजन करें और फिर उनको नमस्कार करें |

कुबेर पूजनम :

सर्वप्रथम निम्नलिखित मन्त्र के साथ कुबेरजी महाराज का आवाहन करें-
आवाहयामि देव त्वामिहायामि कृपां कुरु ।
कोशं वर्द्धय नित्यं त्वं परिरक्ष सुरेश्वर ॥
अब हाथ में अक्षत लेकर निम्नलिखित मंत्र से कुबेरजी का ध्यान करें
मनुजवाह्यविमानवरस्थितं,
गरुडरत्ननिभं निधिनायकम ।
शिवसखं मुकुटादिविभूषितं,
वरगदे दधतं भज तुन्दिलम ॥
हाथ में लिए हुए अक्षतों को कुबेरयंत्र, चित्र या विग्रह के समक्ष चढा दें.
पाद्यं समर्पयामि, अघ्र्य समर्पयामि, आचमनं समर्पयामि, पंचामृत स्नानं समर्पयामि, वस्त्रं समर्पयामि, पुश्प्मालाय्म समर्पयामि,धूपं दीपं द्रश्यमी,नवैध्येम निवेदयामि, ऋतुफलं समर्पयामि, दक्षिणाम समर्पयामि आदि मंत्र से कुबेरजी का षोडशोपचार पूजन करें और फिर उनको नमस्कार करें |

श्री लक्ष्मी पूजनम्

हाथ में पुष्प लेकर श्री महालक्ष्मी का आवाहन करें-
ॐ हिरण्यवर्णा हरिणी सुवर्ण रजतस्त्रजाम्।
चंद्रा हिरण्यमयी लक्ष्मी जातवेदो मे आवह।।
ॐ श्रीं हृीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः आवाहनंचासनं समर्पयामि।
हाथ में अक्षत, पुष्प और जल लेकर पद्मासन में बैठकर श्री महालक्ष्मी देवी का ध्यान करें-
हस्त द्वयेन कमले धारयंती स्वलीलया।
हारनूपुर संयुक्ता लक्ष्मी देवी विचिन्तयेत।।

अष्टलक्ष्मी पूजन

श्री महालक्ष्मी की स्थपना और ध्यान के पश्चात् दाएं हाथ में रोली, अक्षत और पुष्प लेकर अष्ट लक्ष्मियों को अर्पित करते हुए नमस्कार करें-
ॐ आद्या नमः ॐ विद्या लक्ष्म्यै नमः ॐ सौभाग्य लक्ष्म्यै नमः ॐ अमृत लक्ष्म्यै नमः ॐ काम लक्ष्म्यै नमः ॐ सत्य लक्ष्म्यै नमः ॐ भोग लक्ष्म्यै नमः ॐ योग लक्ष्म्यै नमः।

दीप अर्पण मंत्र :
इसके पश्चात् श्री महालक्ष्मी को पांच ज्योतियों वाला गोघृत का दीपक निम्न मंत्र के द्वारा अर्पित करें-
ॐ कर्पासवर्ति संयुक्तं घृतयुक्तं मनोहरम्।
तमो नाशकरं दीपं ग्रहणं परमेश्वरी।।

श्रीसूक्त के मंत्रों से श्री महालक्ष्मी का षोडशोपचार पूजन करें।
ॐ महालक्ष्म्यै नमः पाद्यं समर्पयामि, ॐ महालक्ष्म्यै नमः अघ्र्य समर्पयामि,ॐ महालक्ष्म्यै नमः आचमनं समर्पयामि, ॐ महालक्ष्म्यै नमः पंचामृत स्नानं समर्पयामि, ॐ महालक्ष्म्यै नमः वस्त्रं समर्पयामि, ॐ महालक्ष्म्यै नमः पुश्प्मालाय्म समर्पयामि, ॐ महालक्ष्म्यै नमः धूपं दीपं द्रश्यमी, ॐ महालक्ष्म्यै नमः नवैध्येम निवेदयामि, ॐ महालक्ष्म्यै नमः ऋतुफलं समर्पयामि, ॐ महालक्ष्म्यै नमः दक्षिणाम समर्पयामि आदि मंत्र से महालक्ष्मीजी का षोडशोपचार पूजन करें|

त्रैलोक्य पूजिते देवि कमले विष्णु वल्लभे। यथ त्वमचला कृष्णे तथा भावभार्य स्थिरा।।
ईश्वरी कमला लक्ष्मीश्चला भूतिहरिप्रिया। पद्मा पद्मालया संपदुच्चैः श्री पद्माधारिणी।।
द्वादश एतानि नामानि लक्ष्मी संपूज्यः पठेत्। स्थिर लक्ष्मी केतस्थ पुत्रदारादिभिः सह।।
ॐ हृीं महाक्ष्म्यै च विद्महै, विष्णुपत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात्।।
ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।
श्रीं हृीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद-प्रसीद। श्रीं हृीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः।।
देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्। रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।।
आदि मंत्रो से महादेवी को नमस्कार करें |

सरस्वती पूजन

दीपावली पर सरस्वती पूजन करने का भी विधान है. इसके लिए लक्ष्मी पूजन करने के पश्चात निम्नलिखित मन्त्रों से मॉं सरस्वती का भी पूजन करना चाहिए|
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता,
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना ।
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता,
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥
हाथ में लिए हुए अक्षतों और फूलो को मॉं सरस्वती के चित्र के समक्ष चढा दें|
माँ सरस्वती का षोडशोपचार पूजन करें और फिर उनको नमस्कार करें |
सरस्वती महाभागे देवि कमललोचने ।
विद्यारुपे विशालाक्षि विद्यां देहि नमोऽस्तुते ।

कलम दवात आदि की भी पूजा करें | यह माँ काली की पूजा का प्रतिक होता है |

पहले गणेशजी की आरती करें | फिर माँ लक्ष्मी की आरती करें | 

आरती के बाद दोनों हाथों से फूल लेकर पुष्पांजलि के रूप में माँ को अर्पित करें |

|| ॐ महालक्ष्म्यै नम: पुष्पांजलि समर्पयामि ||


समर्पण :

निम्नलिखित मंत्र का उच्चारण करते हुए महालक्ष्मी के समक्ष पूजन कर्म को समर्पित करें और इस निमित्त जल अर्पित करें :
कृतेनानेन पूजनेन भगवती महालक्ष्मीदेवी प्रीयताम न मम ॥

क्षमा प्रार्थना :

अब मॉं लक्ष्मी के समक्ष दण्डवत प्रणाम करें तथा अनजानें में हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मॉंगते हुए, देवी से सुख -समृद्धि, आरोग्य तथा वैभव की कामना करें|


( इसके बाद आप प्रसाद वितरण करें )

दीवाली की हार्दिक शुभ कामनाएं |
Diwali - Laxmi Pujan Vidhi
लक्ष्मी पूजा विधि

ओम अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोस्ति वा।
य: स्मेरत पुण्डरीकांक्ष स बाह्यभ्यन्तर: शुचि: ॥

चौकी के दायीं ओर घी का दीपक प्रज्जवलित करें। इसके पश्चात दाहिने हाथ में अक्षत और पुष्प लेकर निम्न मंत्रों से स्वस्तिवाचन करें -

ओम स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धाश्रवा: स्वस्ति न: पूषा विश्ववेदा:। स्वस्ति नस्ताक्ष्र्यो अरिष्टनेमि:स्वस्तिनो बृहस्पतिर्दधातु॥

पय: पृथिव्यांपय ओषधीयु पयो दिव्यन्तरिक्षे पयो धा:। पयस्वती: प्रदिश: सन्तु मह्यम। विष्णो रामटमसि विष्णो: श्नप्त्रेस्थो विष्णो: स्यूरिस विष्णोधुरर्वासि:। वैष्णवमसि विष्णवे त्वा॥ अग्निर्देवताव्वातोदेवतासूय्र्योदेवता चन्द्रमा देवताव्वसवो देवता रुद्रोदेवता बृहस्पति: देवतेन्द्रोदेवताव्वरुणादेवता:॥ ओम शांति: शांति: सुशांतिभर्वतु। सर्वोरिष्ठ-शांतिर्भवतु॥

विभिन्न देवता‌ओं के स्मरण के पश्चात निम्नलिखित मंत्र का उच्चारण करें-

विनायकम गुरुं भानुं ब्रहाविष्णुमहेश्वरान।
सरस्वतीय प्रणाम्यादौ सर्वकार्यार्थ सिद्धर्य॥

हाथ में लि‌ए हु‌ए अक्षत और पुष्प को चौकी पर समर्पित कर दें।

एक सुपारी लेकर उस पर मौली लपेटकर चौकी पर थोड़े से चावल रखकर सुपारी को उस पर रख दें। तदुपरांत भगवान गणेश का आह्वान करें-

आहृवान के पश्चात निम्नलिखित मंत्र की सहायता से गणेशजी की प्रतिष्ठा करें और उन्हें आसन दें-

अस्यै प्राणा: प्रतिष्ठन्तु अस्यै प्राणा: क्षरन्तु च।
अस्यै देवत्वमर्चायै मामहेति च कश्चन॥
गजाननं सुप्रतिष्ठिते वरदे भवेताम ॥
प्रतिष्ठापूर्वककम आसनार्थे अक्षतान समपर्यामि गजाननाभ्यां नम:।

पुन: अक्षत लेकर गणेशजी के दाहिनी ओर माता अम्बिका का आवाहन करें
ओम अम्बे अम्बिकेम्बालिके न मां नयति कश्चन।
ससस्त्यश्वक: सुभद्रिकां काम्पीलवासिनीम ।
हेमाद्रितनयां देवीं वरदां शंकरप्रियाम।
लम्बोदरस्य जननीं गौरीमावाहयाम्यहम॥
ओम भूभुर्व: स्व: गौर्य नम:, गौरीमावाहयमि, स्थापयामि, पूजयामि च ।

अक्षत चौकी पर छोड़ दें। अब पुन: अक्षत लेकर माता अम्बिका की प्रतिष्ठा करें-

अस्यै देवत्वमचौर्य मामहेति च कश्चन॥
आम्बिके सुप्रतिष्ठिते भवेताम।
प्रतिष्ठापूर्वकम आसनाथे अक्षतान समर्पयामि गणेशम्बिका नम: ।
ऐसा कहते हु‌ए आसन के समक्ष समर्पित करें।

महाल्क्ष्मी पूजन

उक्त समस्त प्रक्रिया के पश्चात प्रधान पूजा में भगवती महालक्ष्मी का पूजन करना चाहि‌ए। पूजन से पूर्व नवीन चित्र और श्रीयंत्र तथा द्रव्यलक्ष्मी स्वर्ण अथवा चांदी के सिक्के आदि की निम्नलिखित मंत्र से अक्षत छोड़कर प्रतिष्ठा कर लेनी चाहि‌ए।

अस्यै प्राण: प्रतिष्ठन्तु अस्यै प्राणा: क्षरन्तु च ।
अस्यै देवत्मर्चायै मामहेति च कश्चन॥

ध्यान: तदुपरान्त हाथ में लाल कमल पुष्प लेकर निम्न मंत्र देवी लक्ष्मी का ध्यान करें।

आवाहन: हाथ में पुष्प लेकर देवी का आवाहन करे-
सर्वलोकस्य जननीं सर्वसौख्यप्रदासिनौम।
सर्वदेवमदयीमीशां देवीवाहयाम्हम॥

अब पुष्प समर्पित करें।
तप्मका‌ऋनर्वाभं मुक्तामणिविराजितम।
अमलं कमलं दिव्योमासन प्रतिगृहृताम॥
आसन के लि‌ए कमल पुष्प अर्पित करें-

गड्डनदितीर्थसम्भूतं गन्धपुष्पादिभिर्युतम।
पाद्यं ददाम्यी देवि गृहाणाशु नमोस्तुति ते॥

अघ्र्य: निम्न मंत्र से देवी को अघ्र्य दें अष्टगंध से मिश्रित जल से-
अष्टगन्धसमायुक्तं स्वर्णपात्रप्रपूरितम।
अघ्र्यं गृहाण महतं महालक्ष्मी नमोस्तुते॥
ओम महालक्ष्म्यै नम:। अघ्य समर्पयामि॥

स्नान: निम्न मंत्र से देवी को स्नान करा‌एं-
मन्दाकिन्या: समानीतैर्हेमाम्भोरुहासितै:।
स्नानं कुरूष्व देवेशि सलिलैश्च सुगन्धिभि:॥
ओम महालक्ष्म्यै नम:। स्नानं समर्पयामि॥

पचांमृतस्नान: निम्न मंत्र से देवी को पंचामृत घी, शहद, दुग्ध, शर्करा, दही स्नान करा‌ए:
पयो दधि घृतं चैव मधुशर्करयान्वितम।
पत्रामृतं मयानीतं स्नानार्थ प्रतिगुहृताम॥
ओम महालक्ष्म्यै नम:। पंचामृत स्नानं समर्पयामि॥

शुद्धोदक स्नान: निम्न मंत्र से देवी को शुद्धोदक स्नान करा‌एं:
मन्दाकिन्यास्तु यद्वारि सर्वपापहरं शुभम।
तदिदं कल्पित तुभ्यं स्नानार्थ प्रतिगृहृताम॥
ओम महालक्ष्त्यै नम:। शुद्धोदक स्नानं समर्पयातिम॥

वस्त्र: निम्न मंत्र से देवी को वस्त्र अर्पित करें:
दिव्याम्बरं नूतनं हि क्षौमं त्वतिमनोहरम।
दीयमानं मया देवि गृहाण जगदम्बिके॥
ओम महालक्ष्मै नम:। वस्त्रं समर्पयामि॥

आभूषण: निम्न मंत्र से देवी को आभूषण अर्पित करें:
रत्नकड्कणवैदूर्यमुक्ताहारादिकदत्तानि च।
सुप्रसन्नेन मनसा दत्ताति स्वीकुरुष्व भो:॥
ओम महालक्ष्म्यै नम:। आभूषणें समर्पयामि॥

गंध: निम्न मंत्र से देवी को गंध रोली-चंदन अर्पित करें:
श्रीखण्डं चंदन दिव्यं गन्धाढयं सुमनोहरम।
विलेपनं सुरक्षेष्ठ चदंन प्रमितगृहृताम॥
ओम महालक्ष्म्यै नम:। गन्धं समर्पयामि॥

सिंदूर: निम्न मंत्र से देवी को सिंदूर अर्पित करें:
सिन्दूरं रक्तवर्ण व सिन्दूरतिलप्रिये।
भक्त्या दत्तं मया देवि सिन्दूरं प्रतिगृहृताम॥
ओम महालक्ष्म्यै नम:। सिन्दूरं समर्पयामि॥

कुमकुम: निम्न मंत्र से देवी को कुमकुम अर्पित करें:
तैलानि च सुगन्धीनि द्रव्ययाणि विविधानि च।
मया दत्तानि लेपाथ गृहाण परमेश्वरि॥
ओम महालक्ष्म्यै नम:। कुंकुमं समर्पयामि॥

अक्षत: निम्न मंत्र से देवी को अक्षत चावल अर्पित करे:
अक्षताश्च सुरक्षेष्ठे कुड्कमाक्ता: सुशोभिता:।
मया निवेदिता भक्त्या गृहाण परमेश्वरि॥
ओम महालक्ष्म्यै नम:। अक्षतम समर्पयामि॥

अक्षत के स्थान पर अपनी परम्परा के अनुरूप हल्दी की गांठ या गुड़ भी अर्पित किया जाता है।

पुष्प एवं पुष्पमाला: निम्न मंत्र का उच्चारण करते हु‌ए देवी को पुष्प एवं पुष्पमाला अर्पित करे-
माल्यादीनि सुगन्धीनि मालत्यादीनि वै प्रभो।
मयानीतानि पुष्पाणि पूजाथ प्रतिगृहृताम।
ओम महालक्ष्म्यै नम:। पुष्पं पुष्पमालाम च समर्पयामि॥

ओम महालक्ष्म्यै नम:। धूपमाप्रापघामि॥

दीप: निम्न मंत्र का उच्चारण करते हु‌ए देवी को दीप दिखा‌एं:
साज्यं च वर्तिसंयुक्तं वहृना योजित मया।
दीपं गृहाण देवेशि त्रैलोक्यतिमिरापहम॥
ओम महालक्ष्म्यै नम:। दीपम दर्शयामि॥

नैवेद्य: किसी कटोरी में पान के पत्ते के ऊपर नैवेद्य प्रसाद रखें तथा उस पर लौंग का जोड़ा अथवा इलायची रखें। तदुपरांत निम्नलिखित मंत्र का उच्चारण करते हु‌ए देवी को उक्त समस्त सामग्री अर्पित करें-
शर्कराखण्डखाद्यानि दधिक्षीरघृतानि च।
आहारं भक्ष्यभोज्यं च नैवेद्यं प्रतिगृहृाताम॥
उत्तरापानाथ हस्तप्रक्षालनाथ मुख्यप्रक्षलानार्थ च जलं समर्पयामि।

ऐसा कहते हु‌ए जल अर्पित करें।

ऋतुफल और दक्षिणा: अग्रलिखित मंत्र का उच्चारण करते हु‌ए देवी को ऋतुफल और दक्षिणा अर्पित करें:
इदं फलं मया देवि स्थापित पुरतस्तव:।
तेन से सफलावप्तिर्भवेज्जनमनि जन्मनि॥
हिरणगर्भगर्भस्थं हेमबीजं विभावसों:।
अनन्तपुण्यफलमत: शांतिं प्रयच्छ मे॥
ओम महालक्ष्म्यै नम:। ऋतु फलं दक्षिणाम च समर्पयामि:॥

आरती, पुष्पाज्जलि और प्रदक्षिणा

निम्न मंत्र का उच्चारण करते हु‌ए आरती, पुष्पाज्जलि और प्रदक्षिणा करें:

कदलीगर्भसम्भूतं कर्पूरं त प्रदीपितम।
आरार्तिकमहं कुर्वे पश्य मे वरदो भव॥
नानासुगन्धिपुष्पाणि यथाकालोभ्दवानि च।
पुष्पाज्जलिर्मया दत्ता गृहाण परमेश्वरि॥
यानि काानि च पापानि जन्मान्तरकृतानि च।
तानि सर्वाणि नश्यन्तु प्रदक्षिण पदे पदे।
ओम महालक्ष्म्यै नम:। प्रार्थनापूर्वक नमस्कारान समर्पयामि॥

समर्पण

निम्नलिखित का उच्चारण करते हु‌ए महालक्ष्मी के समक्ष पूजन कर्म को समर्पित करें और इस निमित्त जल अर्पित करें-

कृतेनानने पूजनेन भगवती महालक्ष्मीदेवी प्रीयताम न मम॥

उक्त प्रक्रिया के पश्चात देवी के समक्ष दण्डवत प्रणाम करें तथा अनजाने में हु‌ई त्रुटियों के लि‌ए क्षमा मांगते हु‌ए, देवी से सुख-सम़ृद्धि , आरोग्य तथा वैभव की कामना करें।

Sri Maha Lakshmi Pujan Vidhi

जनसाधारण के लिये विधि विधान द्वारा पूजन करना एक दुष्कर कार्य है। जो व्यक्ति कर्मकांड में निपुण होता है, उस व्यक्ति के द्वारा ही यह कार्य कुशलतापुर्वक सम्पन्न किया जाता है। इस पूजन में अनेक मंत्रो का प्रयोग किया जाता है जो कि संस्कृत में होते हैं। इसलिये मंत्रोउच्चारण में त्रुटि की सम्भावना भी रहती है। जो व्यक्ति कर्म कांड से अनभिग्य हैं, वे भी इसे सही तरह से सम्पन्न कर सकते हैं।

Details of Puja Essentials - Laxmi Pujan Samagri

Initial Puja and Preparation

दीपावली (Diwali) के दिन शुभ मुहूर्त (Muhurta) में घर में या दुकान में, पूजा घर के सम्मुख चौकी बिछाकर उस पर लाल वस्तर बिछाकर लछ्मी-गणेश की मुर्ति या चित्र स्थापित करें तथा चित्र को पुष्पमाला पहनाएं। मुर्तिमयी श्रीमहालछ्मीजी के पास ही किसी पवित्र पात्रमें केसरयुक्त चन्दनसे अष्टदल कमल बनाकर उसपर द्रव्य-लछ्मी (रुपयों) को भी स्थापित करके एक साथ ही दोनोंकी पूजा करनी चाहिये। पूजन-सामग्री को यथास्थान रख ले। पूजन के लिये पूर्व (east) या उतर (north) की और मुख करके बैठें। इसके पश्चात धूप, अगरबती और ५ दीप (5 diya) शुध्द घी के और अन्य दीप तिल का तेल /सरसों के तेल (musturd oil) से प्रज्वलित करें। जल से भरा कलश (Kalash) भी चौकी पर रखें। कलश में मौली बांधकर रोली से स्वास्तिक का चिन्ह अंकित करें। तत्पश्चात श्री गणेश जी को, फिर उसके बाद लक्ष्मी जी को तिलक करें और पुष्प अर्पित करें। इसके पश्चात हाथ में पुष्प, अक्षत, सुपारी, सिक्का और जल लेकर संकल्प (sankalp) करें।

Sankalp

मैं (अपना नाम बोलें), सुपुत्र श्री (पिता का नाम बोलें), जाति (अपनी जाति बोलें), गोत्र (गोत्र बोलें), पता (अपना पूरा पता बोलें) अपने परिजनो के साथ जीवन को समृध्दि से परिपूर्ण करने वाली माता महालक्ष्मी (Maha Lakshmi) की कृपा प्राप्त करने के लिये कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या के दिन महालक्ष्मी पूजन कर रहा हूं। हे मां, कृपया मुझे धन, समृध्दि और ऐश्वर्य देने की कृपा करें। मेरे इस पूजन में स्थान देवता, नगर देवता, इष्ट देवता कुल देवता और गुरु देवता सहायक हों तथा मुझें सफलता प्रदान करें।

यह संकल्प पढकर हाथ में लिया हुआ जल, पुष्प और अक्षत आदि श्री गणेश-लछ्मी के समीप छोड दें।

How to do Laxmi Puja? Step by step Poojan Vidhi

इसके बाद एक एक कर के गणेशजी , मां लछ्मी , मां सरस्वती (Accounts Books/Register/Baheekhaata), मां काली (Ink Pot Poojan ), धनाधिश कुबेर Lord Kuber (Tijori/Galla), तुला मान की पूजा करें। यथाशक्ती भेंट, नैवैद्य, मुद्रा, वस्तर  आदि अर्पित करें।

दीपमालिका पूजन (Diya Pujan)

किसी पात्रमें 11, 21 या उससे अधिक दीपों को प्रज्वलित कर महालक्ष्मी के समीप रखकर उस दीप-ज्योतिका "ओम दीपावल्यै नमः" इस नाम मंत्रसे गन्धादि उपचारोंद्वारा पूजन कर इस प्रकार प्रार्थना करे-
त्वं ज्योतिस्तवं रविश्चन्दरो विधुदग्निश्च तारकाः |
सर्वेषां ज्योतिषां ज्योतिर्दीपावल्यै नमो नमः ||

दीपमालिकाओं का पूजन कर अपने आचार के अनुसार संतरा, ईख, पानीफल, धानका लावा इत्यादि पदार्थ चढाये। धानका लावा (खील) गणेश, महालछ्मी तथा अन्य सभी देवी देवताओं को भी अर्पित करे। अन्तमें अन्य सभी दीपकों को प्रज्वलित कर सम्पूर्ण गृह अलन्कृइत करे।

Aarti and Pushpanjali

गणेश, लछ्मी और भगवान जगदीश्वर की आरती करें। उसके बाद पुष्पान्जलि अर्पित करें, छमा प्रार्थना करें। 
पहले "जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा" आरती उसके बाद Mata Lakshmiji Ki Aarti and  Om Jai Jagadish Hare Aarti
Now offer flowers to Goddess Ma Laxmi: Pushpanjali Mantra - Offer flowers to Goddess laxmi

विसर्जन - Visarjan

पूजनके अन्तमें हाथमें अक्षत लेकर नूतन गणेश एवं महालछ्मीकी प्रतिमाको छोडकर अन्य सभी आवाहित, प्रतिष्ठित एवं पूजित देवताओं को अक्षत छोडते हुए निम्न मंत्रसे विसर्जित करे-


यान्तु देवगणाः सर्वे पूजमादाया मामकीम् |
इष्टकामसमृध्दयर्थं पुनरागमनाया च ||

Please Note:

मंदिर, तुलसी माता, पीपल आदि के पास दीपक जलाना नहीं भुलना।

लक्ष्मी पूजा में तिल का तेल का उपयोग ही श्रेष्ठ होता  है | अभाव में सरसों का इस्तमाल कर सकते है |



Bhagwan Dhanvantari Jayanti 
धन्वन्तरि जयंती
Friday, 28 October 2016


लोक-कल्याणार्थ एवं जरा आदि व्याधियों को नष्ट करने के लिए स्वयं भगवान विष्णु धन्वन्तरि के रूप में कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को प्रकट हुए थे, अतः आयुर्वेद-प्रेमी भगवान धन्वन्तरि के भक्तगण एवं आयुर्वेद के विद्वान हर वर्ष इसी दिन आरोग्य-देवता के रूप में उनकी जयंती मनाते हैं।

भगवान धन्वन्तरि का संपूर्ण पूजनादि कृत्य भगवान विष्णु के मंत्रों या पुरुष सूक्त से ही करना चाहिए। साथ ही विष्णु मंत्रों का जप एवं उनकी दिव्य कथाओं का श्रवण भी करना चाहिए। निम्नलिखित मंत्रों से भी पूजन कर जप व यज्ञ कार्य को पूर्ण करें। दिन व रात्रि में भगवन्ताम संकीर्तन भी करें।
भगवान धन्वंतरी की साधना के लिये एक साधारण मंत्र है:

ॐ धन्वंतरये नमः॥

इसके अलावा उनका एक और मंत्र भी है:

ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतराये:अमृतकलश हस्ताय सर्वभय विनाशाय सर्वरोगनिवारणायत्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूपश्री धन्वंतरी स्वरूप श्री श्री श्री औषधचक्र नारायणाय नमः॥


अर्थात
परम भगवन को, जिन्हें सुदर्शन वासुदेव धन्वंतरी कहते हैं, जो अमृत कलश लिये हैं, सर्वभय नाशक हैं, सररोग नाश करते हैं, तीनों लोकों के स्वामी हैं और उनका निर्वाह करने वाले हैं; उन विष्णु स्वरूप धन्वंतरी को नमन है।

DEEPAVALI or Diwali means “a row of lights”. It falls on the last two days of the dark half of Kartik (October-November). For some it is a three-day festival. It commences with the Dhan-Teras, on the 13th day of the dark half of Kartik (hindu month), followed the next day by the Narak Chaudas, the 14th day, and by Deepavali proper on the 15th day.

According to the legends Lakshmi, Goddess of wealth, was incarnated on the new moon day (amaavasyaa) of the Kartik month during the churning of the ocean (samudra-manthan), hence the association of Diwali with Lakshmi. From that day she is worshipped as the symbol of wealth and prosperity. It is also said that on this very day Lord Vishnu rescued Goddess Lakshmi from the prison of Demon king bali and for that reason Goddess Lakshmi is worshipped on the day of Diwali. In Bengal the festival is dedicated to the worship of Kali. It also commemorates that blessed day on which the triumphant Lord Rama returned to Ayodhya after defeating Ravana. On this day also Sri Krishna killed the demon Narakasura.

In South India people take an oil bath in the morning and wear new clothes. They partake of sweetmeats. They light fireworks which are regarded as the effigies of Narakasura who was killed on this day. They greet one another, asking, “Have you had your Ganges bath?” which actually refers to the oil bath that morning as it is regarded as purifying as a bath in the holy Ganges. Everyone forgets and forgives the wrongs done by others. There is an air of freedom, festivity and friendliness everywhere.

This festival brings about unity. It instils charity in the hearts of people. Everyone buys new clothes for the family. Employers, too, purchase new clothes for their employees. Waking up during the Brahmamuhurta (at 4 a.m. ) is a great blessing from the standpoint of health, ethical discipline, efficiency in work and spiritual advancement. It is on Deepavali that everyone wakes up early in the morning. The sages who instituted this custom must have cherished the hope that their descendents would realise its benefits and make it a regular habit in their lives. In a happy mood of great rejoicing village folk move about freely, mixing with one another without any reserve, all enmity being forgotten. People embrace one another with love.

Deepavali is a great unifying force. Those with keen inner spiritual ears will clearly hear the voice of the sages, “O Children of God! unite, and love all”. The vibrations produced by the greetings of love which fill the atmosphere are powerful enough to bring about a change of heart in every man and woman in the world. Alas! That heart has considerably hardened, and only a continuous celebration of Deepavali in our homes can rekindle in us the urgent need of turning away from the ruinous path of hatred.

On this day Hindu merchants in North India open their new account books and pray for success and prosperity during the coming year. The homes are cleaned and decorated by day and illuminated by night with earthern oil-lamps. The best and finest illuminations are to be seen in Bombay and Amritsar. The famous Golden Temple at Amritsar is lit in the evening with thousands of lamps placed all over the steps of the big tank. Vaishnavites celebrate the Govardhan Puja and feed the poor on a large scale.

This year celebrate the Festival of Lights (Diwali) on Sun, 30 October 2016

Following is the list of important materials (samagri) required to perform Maha Lakshmi Pujan, Ganesh Puja, Navagrah Puja, Shodashmatruka Puja, MahaKaali Puja, Maha Sarswati Puja, Kuber Puja, Tula Maan and Deepavali Puja .

Diwali - Lakshmi Pujan Items



Quick Short List of Laxmi Puja Samagri – My Favourite



Also Read: Diwali - Laxmi Pujan Muhurat

Alternate long list of Puja Essential :

1. मूर्तियां - Ganesh & Lakshmi Idols

2. सिक्के - Gold and/or Silver coin embossed with picture of Goddess Lakshmi, new Currency notes

3. वस्त्र - New cloth for Laxmi & Ganeshji

4. चौकियां

5. Cash Register/Accounts Books

6. Coins' Bag

7. Pen

8. Ink Pot (Black)

9. थालियां 3

10. धूप (Dhoop , Agarbati)

11. Pure Ghee, Curd, Honey, Pure Water ( Ganga Jal)

12. पंचाम्रत (Mixture of Milk, Curd, Honey, Sugar, Ghee)

13. हल्दी चूना (Turmeric Powder)

14. रोली  (Kalawaa), अत्तर - (Scent)

15. कलश (Kalash), 2 mtr white and red cloth (each)

16. गमछा handy towel

17. कर्पूर, नरीयल (coconut with water) and गोला

18. Dry Fruits, पुष्प कमल (Flowers including Lotus)

19. दूर्वा - Durvaa

20. Betel leaves, betel nuts

21. Bataashe, Khaand ke Khilone, Sweets

22. Sarees

23. Kheel, Loung, choti Elaichi, mango tree leaves

24. Kesar, Sindoor, Kumkum

25. वन्दनवार - Vandanvaar for entrance Gate

26. Sankha - Conch

27. Ghanta - bell

28. Jewelleries -golden/silver articles (if available)

29. Abhishek Patra

30. Utensil/Bowl (½ Gallon) (Stainless Steel/Plastic) for keeping used water

31. 5 types of Fruits (Mango, Banana, Apple, Orange, Grapes, Pear, Peach etc…)

32. Janve Jod (Pair of Holy thread)

33. Akshata (Rice Grains mixed with Kumkum) - (250 gms)

34. Ashtagandha (Scented Orange Powder)

35. Chandan (Sandlewood)

36. Flower Garland (For murti & photos of dieties used in pooja)

37. Plates / Trays (Stainless steel/plastic) for keeping the Pooja Material

38. मिटी के दिये (small/big Diyas)

39. cotton wicks रुइ

40. Sesame oil (तिल का तेल) /Mustard oil

and Match box

प्रस्तुत वर्ष दीपावली का पर्व Sunday, 30 October 2016 की अमावस एवं स्वाति नक्षत्र योग मे होगा। दीपावली मे अमावस तिथि, प्रदोष, निशीथ एवं महानीशीथ काल तथा तुला का सुर्य वा तुला का चंद्रमा विशेष महत्वपूर्ण माने जाते हैं।


Diwali (Laxmi Puja) Muhurta 2016
प्रदोष काल - अपने नगर के सुर्यास्त से लेकर 2 घन्टे 40 मिनट तक का समय | अर्थात Delhi (India) मे प्रदोष काल सांय सुर्य अस्त 5 बजकर 33 मिनट से शुरू होकर रात 8 बजकर 09 मिनट तक रहेगा।

Delhi मे स्थिर लग्न (वृष) की व्याप्ति रात्रि 18:27 से 20:22 बजे तक रहेगी।

अतेव सांय 18:27 बजे से रात 20:09 तक का प्रदोष काल विशेष रूप से श्री गणेश, श्री महालक्ष्मी पूजन, कुबेर पूजन, बसना अर्थात Accounts Books बही खातो का पूजन, दीपदान, अपने आश्रितों को Sweets, Gifts आदि बांटना तथा धर्मस्थलो पर दानादि करना कल्याणकारी होगा।

निशीथ काल (Nisheetha Kaal) में श्री महालक्ष्मी पूजन, नवग्रह पूजन, स्तोत्र, काम्य मन्तरों के जपानुष्ठान तथा ब्रह्मणो को यथा शक्ति वस्तर (cloth), फल, अनाज धन आदि का दान करना शुभ होता है।

Mahanisheetha Kaal : 23.38 to 24:31+ (Midnignt)

दीपावली पूजन महानिशीथकाल में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है, जिसमें पूजन शास्तरोक्त विधि अनुसार करना अनिवार्य है। महानिशीथकाल में मुख्यतः तांत्रिक , ज्योतिषविद, वेद्पाठी, विद्वान, ब्राह्मण, अघोरी, विधिवत, यंत्र मंत्र तंत्र द्वारा, विभिन्न शक्तियों का पूजन करते हैं एवं उनका आवाहान करते हैं।

सिंह लग्न : 24:57+ to 27:14+
(Without Amavasya Tithi)

Chaughadia Muhurat for Businesses (India)


LAXMI PUJA DATE FOR USA, CANADA
Sat, 29 October 2016


1. इस वर्ष अमावस, प्रदोष काल एवं वृष लग्न का विशेष महत्व रहेगा तथा यथासंभव इस काल में पूजन प्रारंभ कर लेना चाहिए |
2. निशीथ काल में श्रीसूक्त, कनकधारा स्तोत्र एवं लक्ष्मी स्तोत्र आदि मंत्रो का जपानुष्ठान करें |
3. महानिशीथ काल में तंत्र-मंत्र-यन्त्र एवं याज्ञिक क्रिया का संपादन करें |

P.S: Time is believed to be correct.

दीपावली पूजन के पश्चात गृह में एक चौमुखा दीपक रात भर जलता रहना लक्ष्मी एवं सौभाग्य में वृध्दि का प्रतीक माना जाता है।

|| Happy Diwali ||

श्रीमहालक्ष्मी पूजन एवं दीपावली का महापर्व कार्तिक कृष्ण अमावस में प्रदोष काल एवं अर्धरात्रि व्यापिनि हो, तो विशेष रुप से शुभ होती है ।

लक्ष्मी पूजन, दीपदानादि के लिये प्रदोषकाल ही विशेषतया प्रश्स्त माना गया है-
कार्तिके प्रदोषे तु विशेषेण अमावस्या निशावर्धके ।
तस्यां सम्पूज्येत्‌ देवीं भोगमोक्षं प्रदायिनीम ॥ (भविष्य पुराण)

अपने नगर के सूर्यास्त के समय से २.२४ मिनट तक का समय प्रदोष काल कहलाता है। अगर सूर्यास्त ६ बजे का है तो प्रदोष काल ८.२४ तक का होगा । कहीं कहीं ८-१२ मिनट का अन्तर आ सकता है, उसके लिये उचित होगा आप प्रदोष काल में १५ मिनट अन्तर रखें। जैसे ६ बजे को ६.१५ माने ८.२४ को ८.०९ ।
लो !! निकल आया लक्ष्मी पूजा मुहूर्त ।

Laxmi - Dipmala Pujan 2016 : Sat, 30 October

Pradosh Kal: 17:33 to 20:09 (Delhi,India) 

स्थिर लग्न प्रदोष काल के साथ हो तो अति शुभ होगा । 
भारत में वृष लग्न प्रदोष काल बेला में उपस्थित है ।

दिल्ली में 18:27 से 20:22 तक वृष लग्न होगा ।

Shubh Chaughadia

17:33 से 19:11 मिं तक रात्रि की शुभ चोघडिया भी रहेंगी।



Most Auspicious Time for Deepotsav & Maha Lakshmi Pujan

18:27 to 20:09



Auspicious for Yantra-Tantra-Mantra Sadhana
23:38 to 24:31+

सिंह लग्न : 24:57+ to 27:14+ (i.e midnight) 
Note: Simha Lagna is without Amavasya Tithi


व्यापारिक प्रतिष्ठानों में लक्ष्मी पूजा के लिए उत्तम समय |
Laabh Ki Chaughadia (दिन) : 09:20 TO 10:42

Shubh Chaughadia (दिन ) : 13:27 to 14:49
Amrit Chaughadia (दिन ) : 10:42 to 12:05


कर्ज में डूबे अथवा घाटे में चल रहे व्यापारी कुम्भ लग्न में लक्ष्मी पूजन करें तो लाभ होगा ।



DIWALI PUJAN DATE USA, CANADA & SOUTH AMERICA: Sat, 29 October 2016

देव-मंदिर दर्शन, दीपावली बधाईयां, भेंट, स्नान, दान आदि कार्य आप अमावस्या तिथि में करें ।

Maa Lakshmi is said to be unsteady and transient and does not stay at one place for long. Since everyone desires that She stay within the home permanently, prayers are offered to Maa Lakshmi. It is believed that the art of attracting Goddess Laxmi through devotion is secret and difficult to achieve. This is because of a strict direction by Vishvamitra, who directed that the procedures must be kept secret and taught to a capable successor only at the end of one's life.

It is believed that during the churning of the ocean by the gods and the asurs when Lakshmi appeared, Indra offered prayers that pleased Her. In blessing, She told him that whoever receives the 12-letter mantra from him and repeats it devotedly during the three prayers everyday shall attain prosperity like Kuber. This was the beginning of prayers to Ma Lakshmi.
In the Ravana Samhita, Ravana has said that devotion to Lakshmi is an outstanding devotion, and that he learnt it from Kuber, the God of Wealth. He said that with that knowledge he was able to make Lanka prosperous.

In the Mahabharata, Udyogparv, it is said: Patience, self-control, control over the senses, compassion, gentle speech and holding no grudges against friends and others promote glory and prosperity.
In the Goraksh Samhita, Guru Gorakhnath has also described devotion to Lakshmi a outstanding. Lord Krishna stressed that through devotion to Lakshmi great prosperity can be attained as He did in Dwarka. In the Hitopadesh, 178, it is said: Whoever is enthusiastic, active, capable in his work, not addicted to vice, grateful and devotedly friendly shall find that Lakshmi voluntarily comes to reside in his home.
Govardhan Puja, Annakut : Mon, 31 October 2016
Govardhan Puja Muhurta: 3.21 pm to 5.32 pm

The day after Deepawali is celebrated as Govardhan Puja (गोवर्धन पूजा). This year, Mon, 31 Oct 2016, when Mount Govardhan, near Mathura, is worshipped. Pious people keep awake the whole night and cook 56 (or 108) different types of food for the bhog (भोग - the offering of food) to Krishna. This ceremony is called annkut (अन्‍नकूट) which means a mountain of food. Various types of food – cereals, pulses, fruit, vegetables, chutneys, pickles, and salads – are offered to the Deity and then distributed as prasada to devotees. This festival is in commemoration of the lifting of Mount Govardhan by Lord Krishna.

According to a legend, before Krishna was born, Indra, the god of Rain, was the chief deity of Vraj. Then Krishna instigated the people to stop worshipping Indra. Indra wanted to show his power over Krishna and brought about a cloud-burst which flooded the countryside for many days. People were afraid that the downpor was a result of their neglect of Indra. But Krishna assured them that no harm would befall them. He lifted Mount Govardhan with his little finger and sheltered men and beasts from the rain. This gave him the epithet Govardhandhari. After this, Indra accepted the supremacy of Krishna.

In the temples in Mathura and Nathadwara, the idols of the deities are given milk bath, are dressed in shining attires with lots of ornaments. After the offering of prayers, sweets are raised in the form of a mountain before the deities as 'Bhog' and after that the devotees approach the mountain of Food in order to take prasad from it.

According to the Vedic scriptures Giri Govardhan is greater than even the transcendental kingdom of Vaikuntha (बैकुण्ठ) , the eternal abode of Lord Vishnu.


|| श्रीगिर्रिराज धरण प्रभु तेरी शरण ||
Bhai Dooj, Yam Dwitiya
Tuesday, 1 November 2016

Bhai Duj Tika Muhurta
13:09 to 15:20

Bhaiya Dooj (भय्या दूज), comes once a year after diwali on second day of bright fortnight of kartik (this year Tue, 1 Nov 2016). The sister applies the tikka on the brother’s forehead. The Puja is usually performed in the mother’s house before the brothers leave for work or study.

Bhai Duj is also called 'Yama Dwiteeya' as it's believed that on this day, Yamaraj, the Lord of Death and the Custodian of Hell, visits his sister Goddess Yamuna, who puts the auspicious mark on his forehead and prays for his well being. So it's held that anyone who receives a Tilak from his sister on this day would never be hurled into hell.

According to one legend, on this day, Lord Krishna, after slaying the Narakasura demon, goes to his sister Subhadra who welcomes Him the lamp, flowers and sweets, and puts the holy protective spot on her brother's forehead.

Bhaiya Dooj is a day dedicated to sisters. We have heard about Raksha Bandhan (brothers day). Well this is sister’s day, that anyone who receives tilak from his sister on this day will never be thrown.