Basant Panchami 2016 - Saraswati Jayanti

by 2/10/2016 0 comments
VASANT PANCHAMI -  Fri, 12 February 2016

 सरस्वति महाभागे विद्ये कमललोचने ।
विद्यारूपे विशालाक्षि विद्यां देहि नमोस्तुते ॥

"O Devi Saraswati, the most Auspicious Goddess of Knowledge with Lotus-like Eyes, An Embodiment of Knowledge with Large Eyes, Kindly Bless me with Knowledge. I Salute you."
जिनकी कांति हिम, मुक्ताहार, कपूर तथा चंद्रमा की आभा के समान धवल है, जो परम सुंदरी हैं और चिन्मय शुभ-वस्त्र धारण किए हुए हैं, जिनके एक हाथ में वीणा है और दूसरे में पुस्तक। जो सर्वोत्तम रत्नों से जड़ित दिव्य आभूषण पहने श्वेत पद्मासन पर अवस्थित हैं। जो ब्रह्मा, विष्णु और शिव प्रभृति प्रधान देवताओं और सुरगणों से सुपूजित हैं, सब श्रेष्ठ मुनि जिनके चरणों में मस्तक झुकाते हैं। ऐसी भगवती सरस्वती का मैं भक्तिपूर्वक चिंतन एवं ध्यान करता हूँ। उन्हें प्रणाम करता हूँ। वे सर्वदा मेरी रक्षा करें और मेरी बुद्धि की जड़ता इत्यादि दोषों को सर्वथा दूर करें।

माघ शुक्ल पंचमी से बसंत ऋतु की शुरूआत होती है जो फाल्गुन कृष्ण पंचमी को पूर्ण होती है। बसंत पंचमी का दिन सभी प्रकार के कार्यों के लिए शुभ माना गया है। मलमास समाप्ति के बाद यह सबसे अधिक शुभ दिन होता है। किंवदंती है कि इसी दिन ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना की थी।

लेखन, साहित्य, कला और विशेषकर विद्यार्थियों के लिए बसंत पंचमी का दिन विशेष महत्व वाला होता है क्योंकि आज ही के दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। मां सरस्वती की कृपा से ही विद्या, बुद्धि, वाणी और ज्ञान की प्राप्ति होती है। देवी कृपा से ही कवि कालिदास ने यश और ख्याति अर्जित की थी। वाल्मीकि, वसिष्ठ, विश्वामित्र, शौनक और व्यास जैसे महान ऋषि देवी-साधना से ही कृतार्थ हुए थे। चूंकि मां सरस्वती की उत्पत्ति सत्वगुण से मानी जाती है, इसलिए इन्हें श्वेत वर्ण की सामग्रियां विशेष प्रिय हैं। जैसे- श्वेत पुष्प, श्वेत चंदन, दूध, दही, मक्खन, श्वेत वस्त्र और श्वेत तिल के लड्डू।

मार्कण्डेय पुराण में वर्णित सरस्वती के "घंटा शूलहलानि..." श्लोकों के जाप व हवन करने से बुद्धि कुशाग्र होती है। कलियुग में दान का महत्व बसंतोत्सव में प्रमुख है। इस दिन पीत वस्त्र एवं आभूषणादि का दान सरस्वती पूजा कर कुमारियों, विप्रों व निर्धनों को देने से घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है। इस ऋतु में पीले पुष्पों से शिवलिंग की पूजा करने से भक्तजन तेजस्वी दीर्घायु होते हैं। बसंत पंचमी के दिन शुभ कार्य (विवाह, भवन निर्माण, कूप निर्माण, फैक्ट्री आदि का शुभारंभ, कॉलेज आदि की स्थापना) किया जाता है।


Ajay Govind

Devotee,Author

My profile has nothing great to write but I have blessings of Lord Ganesha, Maa Saraswati, Guru Bhagwan and Lord Sri HariHar.