Sri Mahachandi Strotra - Jai Chandi Ambe Maharani

By Govind

महा चण्डी स्तोत्र

जय चण्डी अम्बे महारानी। जय वरदाती जय कल्याणी ।

सिंह वाहिनी खड़ग धारनी। जय दुर्गा जय दैत्य संहारनी।

दक्ष सुता जय उमा भवानी। शंकर प्रियदाती सुखदानी।

चिंता सकल निवारन वाली। मुंड माल को धारने वाली।

मधु कैटम संहारे तू नैं । चण्ड मुण्ड भी मारे तू नें।

महिषासुर का सीस उतारा। रक्तबीज का पिया लहू सारा ।

शुम्भ निशुम्भ का नाम मिटाया। देवराज को तख्त बिठाया ।

भीड जभी देवों पर आई। तू ही चण्डी हुई सहाई।

खंडे वाली खप्पर वाली। तेरे दर का ‘चमन’ सवाली।

शारदा बन उपकार हो करती। लक्ष्मी बन भण्डार हो भरती।

तू ही वैष्णो तू ही बालिका, तू ही ज्वाला देवी कालिका ।

अमर सदा तेरी अमर कहानी। जय मां चण्डी आदि भवानी।

कलह क्लेश से मुझे बचाना। सगरी चिन्ता दूर हटाना।

कोई दुःख न मुझे सताये, कोई गम न मुझे दबायें।

गंधव देवों की माया । भूतप्रेत दैत्यों की छाया।

झूठे सच्चे सपनों का डर । जादू टोने यन्त्र मन्त्र ।

कर्जा झगड़ा कोई बिमारी। संकट आफत विपता भारी।

इनसे मैय्या मुझे बचाइयो। चण्डी अपनी दया दिखाइयों ।

तेरा भरोसा तेरा सहारा। तेरे बिन न कोई रखवारा।

तेरा हर दम ध्यान धरूं मैं। चरणों में प्रणाम करूं मैं।

मेरे औगुण ध्यान न धरियो। चंडिका मेरी रक्षा करियो ।

इज्जत मान बनाये रखना। शत्रुओं से भी बचाये रखना।

मेरा तेज बढ़ाती रहना। अपनी दया दिखाती रहना।

मेरे हाथ में बरकत भर दो। पूर्ण मेरी आशा कर दो।

अपना नाम जपाना मुझको। दाती सुखी बनाना मुझकों।

मेरे सिर पर हाथ धरो मां। ‘चमन’ का भी कल्याण करो ।


|| Sri Mahachandi Strotra ||

Jai Chandi Ambe Maharani, Jai Vardati Jai Kalyani Singh Vahini, Kharagh Dharini, Jai Durge Jai Daitya Shangharini |

Daksh Suta Jai Uma Bhavani, Shankar Priye Dati Sukh Dani Chinta Sakal Nivarane Vali, Mund Maal Ko Dharane Vali Madhu Keitabh Sanghare Tu Ne, Chand Mund Bhi Mare Hai Tu Ne Mahishasur Ka Shish Utara, Rakt Bij Ka Piya Lahu Sara |

Sumbh Nisumbh Ka Naam Mitaya, Devraj Ko Takth Bithaya Bhid Jabhi Devon Par Aayee, Tu Hi Chandi Huyee Sehayee Khande Vali, Khapar Vali, Tere Dar Ka Chaman Hai Sevali Sharada Ban Upkar Ho Karti, Laxmi Ban Bhandar Ho Bharti |

Tu Hi Vaishno, Tu Hi Balaka, Tu Hi Jwala Devi Kalka Amar Sadha Teri Amar Kahani, Jai Maa Chandi Adhi Bhavani Ish Kalah Kesh Say Mujhe Bachana, Sagri Chinta Tum Dur Hatana Koyi Dukh Na Mujhe Sataye, Koyi Gam Na Mujhe Dabaye |

Gandharvon Devon Ki Maya, Bhut Pret Daityon Ki Chhaya Jhutay Sachay Sapno Ka Dar, Jadu Tone Jantra Mantra Karza Jhagara Koyi Bimari, Sankat Aphat Vipta Bhari In Say Maiya Mujhe Bechayio, Chandi Apni Daya Dikhayio |

Tera Bharosa Tera Sahara, Tere Bina Na Hai Koyi Rakhvara Tera Hardam Dhyan Dharu Main, Charno Mein Pranaam Karoon Main Mere Avgun Dhyan Na Dhariyo, Chandika Meri Raksha Kariyo Izzat Mann Banaye Rakhna, Shatruon Say Bhi Bachaye Rakhna |

Mera Tej Badhati Rehna, Apni Daya Dikhati Rehna Mere Haath Mein Barkat Bhar Do, Puran Meri Asha Kar Do Apna Naam Japana Tum Mujkho, Dati Sukhi Banana Mujhko Mere Shir Par Haath Dharo Maa, Chaman Ka Bhi Kalyaan Karo Maa |

|| Jai Mata Di ||

जय माँ चण्डी अंबे महारानी! यह पवित्र श्री महाचण्डी स्तोत्र, आदिशक्ति दुर्गा के विकराल किंतु करूणामयी रूप महाचण्डी को समर्पित एक गहन भक्तिपूर्ण आह्वान है, जो उनकी असीम शक्ति और कल्याणकारी स्वरूप का गुणगान करता है। 

जैसे ही हम इस स्तोत्र के प्रथम शब्दों में प्रवेश करते हैं, 'जय चण्डी अंबे महारानी, जय वरदाती जय कल्याणी,' हमारे समक्ष देवी का वह भव्य और तेजस्वी रूप साकार हो उठता है जो वरदानों की दात्री, कल्याण करने वाली और समस्त विघ्नों का हरण करने वाली हैं। 

वह सिंहवाहिनी, खड़गधारिणी, दुर्गे हैं – जिनकी गर्जना मात्र से दैत्य थर्रा उठते हैं और उनका खड़ग अधर्मियों का संहार करता है। स्तोत्र उन्हें दक्ष सुता उमा भवानी, शंकर प्रिया और सुखदायिनी के रूप में भी पूजता है, जो बताती हैं कि वह केवल विध्वंसिका नहीं, अपितु सृजन और प्रेम की भी अधिष्ठात्री हैं। उनकी चिंता निवारी शक्ति का वर्णन करते हुए उन्हें 'चिंता सकल निवारने वाली' और 'मुंड माल को धरने वाली' कहा गया है, जो इस बात का प्रतीक है कि वह अपने भक्तों के समस्त भय और दुखों को दूर करती हैं, भले ही उनका स्वरूप कितना भी उग्र क्यों न हो।

स्तोत्र में देवी के उन महान पराक्रमों का विस्तृत वर्णन है, जिन्होंने सृष्टि को आसुरी शक्तियों से मुक्त किया। मधु-कैटभ जैसे प्रबल दैत्यों से लेकर चंड-मुंड, महिषासुर और रक्तबीज जैसे अजेय शत्रुओं का वध करके उन्होंने धर्म और सत्य की स्थापना की। 'शंभु-निशंभ का नाम मिटाया, देवराज को तख्त बिठाया' – ये पंक्तियाँ उनके उस शौर्य को दर्शाती हैं जब उन्होंने देवताओं को संकट से उभारा और स्वर्ग का राजपाठ पुनः स्थापित किया। जब भी देवताओं पर संकट आया, चंडी ही उनकी सहायक बनीं। वह खड्ग वाली और खप्पर वाली हैं, जिनके दर पर सेवक सदैव नतमस्तक रहते हैं। देवी के विभिन्न रूपों का भी इसमें उल्लेख है: शारदा बनकर वह उपकार करती हैं, लक्ष्मी बनकर भंडार भरती हैं। वह वैष्णो, बालका, ज्वाला और कालका के रूप में भी पूजित हैं, जो उनकी सर्वव्यापकता और बहुआयामी शक्ति को सिद्ध करता है। उनकी अमर कहानी सदा अमर है, क्योंकि वह आदि भवानी, परमेश्वरी हैं। यह स्तोत्र केवल देवी की स्तुति नहीं, अपितु उनके विराट स्वरूप का विस्तृत वर्णन है जो हमें उनकी असीम शक्ति, पराक्रम और करुणामयी स्वभाव का बोध कराता है।

यह स्तोत्र केवल देवी की महिमा का गान नहीं है, अपितु एक भक्त की ओर से माँ चण्डी से की गई हार्दिक प्रार्थनाओं का संग्रह भी है। इन प्रार्थनाओं में भक्त अपनी हर छोटी-बड़ी चिंता, भय और संकट से मुक्ति की कामना करता है। वह कहता है, 'ईश कलह क्लेश से मुझे बचाना, सागरी चिंता तुम दूर हटाना, कोई दुख ना मुझे सताये, कोई गम ना मुझे दबाये।' यह पंक्तियाँ दर्शाती हैं कि जीवन के नित्य प्रति के कलह, क्लेश और मानसिक चिंताओं से मुक्ति के लिए भक्त पूरी तरह माँ पर आश्रित है। वह गांधर्वों, देवों की माया, भूत-प्रेत और दैत्यों की छाया से, झूठे-सच्चे सपनों के डर से, जादू-टोने और तंत्र-मंत्र के दुष्प्रभाव से, कर्ज, झगड़े, बीमारियों और आकस्मिक आपदाओं से बचाने की गुहार लगाता है। 

यह जीवन की उन सभी अज्ञात और ज्ञात बाधाओं का प्रतिनिधित्व करता है जिनसे मनुष्य भयभीत रहता है। भक्त का अटूट विश्वास इन शब्दों में झलकता है, 'तेरा भरोसा तेरा सहारा, तेरे बिना ना है कोई रखवारा।' माँ चण्डी ही उसकी एकमात्र संरक्षक हैं, इसलिए वह हर पल उनका ध्यान करता है और उनके चरणों में प्रणाम करता है। वह अपनी गलतियों और अवगुणों के लिए क्षमा याचना करते हुए कहता है, 'मेरे अवगुण ध्यान ना धरियो, चंडिका मेरी रक्षा करियो।' यह भक्त की विनम्रता और देवी की परम क्षमाशीलता में विश्वास को दर्शाता है। भक्त अपनी इज़्ज़त और मान-सम्मान को बनाए रखने, शत्रुओं से रक्षा करने, अपने तेज (ओज/प्रभा) को बढ़ाने और अपनी दया दृष्टि बनाए रखने की भी प्रार्थना करता है। 

आर्थिक समृद्धि और आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए वह कहता है, 'मेरे हाथ में बरकत भर दो, पूरन मेरी आशा कर दो।' यह प्रार्थना मनुष्य की भौतिक और आध्यात्मिक दोनों प्रकार की इच्छाओं को समाहित करती है। अंततः, भक्त मोक्ष और आत्मिक सुख की कामना करते हुए कहता है, 'अपना नाम जपाना तुम मुझको, दाती सुखी बनाना मुझको, मेरे शिर पर हाथ धरो माँ, चमन का भी कल्याण करो माँ।' यह प्रार्थना दर्शाती है कि सच्चे सुख की प्राप्ति देवी के नाम स्मरण और उनके आशीर्वाद से ही संभव है। यह 'चमन' (कवि या सामान्य भक्त) के कल्याण की कामना के साथ समाप्त होती है, जो समस्त मानवता के लिए कल्याण की भावना को प्रदर्शित करती है। यह स्तोत्र हमें सिखाता है कि श्रद्धा और समर्पण के साथ माँ चण्डी की शरण में जाने से सभी प्रकार के भय, संकट और चिंताएँ दूर हो जाती हैं और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि का आगमन होता है।

Summary

This article delves into the profound devotion expressed in the 'Sri Mahachandi Strotra,' a powerful hymn dedicated to Goddess Mahachandi, a fierce yet compassionate form of Durga. The first paragraph elaborates on the goddess's divine attributes, describing her as the bestower of boons, the bringer of welfare, and the remover of all worries. It highlights her role as the lion-riding, sword-wielding protector who vanquished formidable demons like Madhu-Kaitabh, Chanda-Munda, Mahishasura, Raktabija, Shumbh-Nishumbh, restoring order and aiding the gods. The article also touches upon her various manifestations as Sharada, Lakshmi, Vaishno, Jwala, and Kalika, emphasizing her omnipresence and multifaceted power. The second paragraph focuses on the devotee's earnest prayers within the Strotra, seeking protection from life's myriad challenges, including conflict, anxiety, evil influences, black magic, debt, illness, and calamities. It underscores the devotee's unwavering faith in Mahachandi as the sole protector and provider, humbly asking for forgiveness, preservation of honor, protection from enemies, increase in radiance, abundance, and the fulfillment of all desires. The ultimate plea is for the goddess to enable the devotee to chant her name, grant happiness, and extend her blessings for universal welfare, illustrating the deep spiritual surrender and aspiration for liberation through devotion.

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Comments

November 13, 2016 at 5:42 PM
Thank u so much for posting this Shri mahachandi stotra... I was searching for it! Big thanks to u.. Jai mata di!
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