बसंत पंचमी का पावन पर्व, ज्ञान, विद्या, कला और संगीत की देवी माँ सरस्वती को समर्पित है। यह दिन प्रकृति में नए जीवन का संचार करता है और विद्यारंभ, कला सीखने तथा ज्ञान प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। माँ सरस्वती की आराधना से बुद्धि, विवेक और रचनात्मकता की प्राप्ति होती है। यह पूजा केवल अकादमिक सफलता ही नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में ज्ञान और अंतर्दृष्टि प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करती है। विशेष रूप से छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, कलाकारों और साहित्यकारों के लिए यह पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस लेख में हम माँ सरस्वती की विस्तृत पूजा विधि का वर्णन करेंगे, जिसमें आवाहन से लेकर विसर्जन तक के सभी महत्वपूर्ण मंत्रों और चरणों को शामिल किया जाएगा, ताकि भक्तगण पूर्ण विधि-विधान से देवी की आराधना कर सकें और उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकें।
माँ सरस्वती की पूजा के लिए सर्वप्रथम स्थान को स्वच्छ और पवित्र करें। एक चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर माँ सरस्वती की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। गणेश जी की मूर्ति भी साथ रखें, क्योंकि शुभ कार्य से पहले गणेश पूजन अनिवार्य है। पूजन सामग्री में कलश, गंगाजल, अक्षत, हल्दी, कुमकुम, चंदन, धूप, दीप, अगरबत्ती, सफेद या पीले पुष्प, माला, फल (बेर, केले), मिठाई (बूंदी, लड्डू), मिश्री, दही, शहद, घी, कलम, पुस्तक, स्लेट और पीला वस्त्र शामिल करें। पूजा के लिए स्वयं भी पीले वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। सभी सामग्री को एकत्रित करके व्यवस्थित कर लें। शुभ मुहूर्त का ध्यान रखें, जो पंचांग से निर्धारित होता है। पूजा से पहले स्नान कर स्वच्छ हो जाएं और मन को शांत एवं एकाग्र कर लें।
पूजा का आरंभ संकल्प के साथ करें। हाथ में जल, चावल, पुष्प लेकर अपना नाम, गोत्र, स्थान और पूजा का उद्देश्य बोलते हुए संकल्प लें। दीपक प्रज्ज्वलित कर गणेश जी का पूजन करें। इसके उपरांत, गुरु वंदना करें। अब माँ सरस्वती का आवाहन करें। आवाहन मंत्र: "ॐ भूर्भुवः स्वः श्रीसरस्वती-देव्यै नमः। सरस्वतीमावाहयामि, स्थापयामि।" इसके बाद, माँ की प्रतिमा या तस्वीर में प्राण प्रतिष्ठा हेतु मंत्र जाप करें: प्राण प्रतिष्ठा मंत्र: "ॐ मनोजूतिर्जुषतामाज्यस्य बृहस्पतिर्यज्ञमिमं तनोत्वरिष्टं यज्ञं समिमं दधातु। विश्वे देवास इह मादयन्तामो३म्प्रतिष्ठ।" इस मंत्र के साथ माँ को आसन प्रदान करें: आसन मंत्र: "ॐ अनेकरत्नसंयुक्तं नानामणिगणान्वितम्। करिश्याम्यासनं दिव्यं गृहाण परमेश्वरि॥" फिर पाद्य, अर्घ्य, आचमन और स्नान का प्रतीकात्मक विधान करें।
स्नान के बाद माँ सरस्वती को स्वच्छ पीला वस्त्र और आभूषण अर्पित करें। उन्हें चंदन, कुमकुम, हल्दी, सिंदूर लगाएं। फिर अक्षत, सफेद या पीले पुष्प और माला अर्पित करें। धूप और दीप प्रज्ज्वलित कर उन्हें दिखाएं। माँ को नैवेद्य अर्पित करें, जिसमें फल, मिठाई, मिश्री और बेर विशेष रूप से शामिल हों। जल अर्पित करना न भूलें। इन सभी क्रियाओं के दौरान निम्नलिखित मंत्रों का जाप करें: पुष्प समर्पण मंत्र: "ॐ पुष्पं समर्पयामि देव्यै सरस्वतीदेव्यै नमः।" धूप दीप दर्शन मंत्र: "ॐ धूपं दर्शयामि देव्यै सरस्वतीदेव्यै नमः।" नैवेद्य समर्पण मंत्र: "ॐ नैवेद्यं समर्पयामि देव्यै सरस्वतीदेव्यै नमः।" इसके पश्चात, माँ सरस्वती के मूल मंत्र "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः" का कम से कम 108 बार जाप करें, या "ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः" का जाप करें। यह जाप करते समय मन को एकाग्र रखें और ज्ञान प्राप्ति की प्रार्थना करें।
पूजा के इस चरण में माँ सरस्वती का ध्यान करते हुए सरस्वती वंदना करें, जो ज्ञान और विद्या की देवी की महिमा का गुणगान करती है। सरस्वती ध्यान मंत्र: "या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता, या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता, सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥" इसके बाद, पुष्पांजलि अर्पित करें। हाथ में फूल लेकर प्रार्थना करें और उन्हें माँ के चरणों में समर्पित करें: पुष्पांजलि मंत्र: "ॐ नानासुगन्धिपुष्पाणि यथाकालभवानी च। पुष्पांजलिर्मया दत्तं गृहाण परमेश्वरि॥" बच्चों को अपनी किताबें और पढ़ाई का सामान माँ के चरणों में रखने को कहें। ऐसा करने से माँ सरस्वती उन पर कृपा करती हैं और उनकी बुद्धि तीव्र होती है। इस दौरान, "ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं सौं सौं ह्रीं ऐं स्वाहा।" इस बीज मंत्र का जाप भी कर सकते हैं, जो विद्या प्राप्ति के लिए प्रभावी है। माँ से अज्ञानता के अंधकार को दूर करने और ज्ञान का प्रकाश फैलाने की प्रार्थना करें।
पूजा के अंत में माँ सरस्वती की आरती करें। कपूर या घी के दीपक से आरती उतारें और सभी उपस्थित भक्तों को आरती लेने को कहें। आरती मंत्र: "ॐ जय जगदीश हरे" के समान ही सरस्वती आरती का गायन करें, या कोई अन्य प्रचलित सरस्वती आरती गाएं। आरती के बाद क्षमा प्रार्थना करें। पूजा में हुई किसी भी त्रुटि के लिए माँ से क्षमा याचना करें: क्षमा प्रार्थना मंत्र: "आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वरि॥" इसके बाद, तीन बार प्रदक्षिणा करें। अंत में, हाथ जोड़कर माँ से आशीर्वाद मांगे और प्रसाद वितरण करें। यदि प्रतिमा स्थापित की है तो पूजा समाप्ति के बाद विसर्जन करें। कलश के जल को पूरे घर में छिड़क दें। माँ की प्रतिमा को आदरपूर्वक किसी पवित्र नदी, तालाब या जल स्रोत में विसर्जित करें। विसर्जन मंत्र: "गच्छ गच्छ सुरश्रेष्ठे स्वस्थानं परमेश्वरि। पूजाहानिविनाशाय पुनरागमनाय च॥" यह विसर्जन इस कामना के साथ किया जाता है कि माँ अगले वर्ष पुनः हमारे घर पधारें।
Summary
This article provides a detailed guide to performing Saraswati Puja, from invocation to immersion, including all essential mantras. It covers the significance of Basant Panchami, preparation of the altar, step-by-step rituals for invoking Goddess Saraswati, offering various items like flowers, incense, and food, and chanting specific mantras for knowledge and wisdom. The article concludes with the Aarti, a prayer for forgiveness, and the ceremonial immersion (Visarjan) of the idol, ensuring devotees can perform the puja with complete authenticity and devotion to seek the blessings of the Goddess of knowledge, music, and art.

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