Magh Snan - Holy Bath : माघमास-माहात्म्य और माघी पूर्णिमा

By Govind

माघ मास स्नान – माघ स्नान का महत्व (2026)

हिंदू पंचांग में माघ मास को अत्यंत पवित्र माना गया है। यह मास तप, संयम, स्नान और दान के लिए विशेष रूप से प्रशस्त कहा गया है। मान्यता है कि इस अवधि में किया गया साधारण स्नान भी असाधारण पुण्य प्रदान करता है।



संक्षेप में

विषय विवरण
पर्व / काल माघ मास स्नान
माघ मास अवधि 4 जनवरी 2026 से 1 फरवरी 2026
मुख्य कर्म प्रातः स्नान, दान, संयम, जप

माघ मास का शास्त्रीय महत्व

पद्मपुराण के उत्तरखण्ड में माघ मास के माहात्म्य का वर्णन करते हुए कहा गया है कि व्रत, दान और तपस्या से भी भगवान श्रीहरि उतने प्रसन्न नहीं होते, जितने कि माघ मास में किए गए स्नान मात्र से।

इस कारण स्वर्ग-लाभ, पाप-नाश और भगवान वासुदेव की प्रीति के लिए माघ स्नान को विशेष रूप से अनुशंसित किया गया है।

यह भी कहा गया है कि जो व्यक्ति सूर्य के मकर राशि में स्थित होने पर माघ मास में स्नान करता है, उसे दीर्घकाल तक उत्तम लोकों की प्राप्ति होती है।

माघ मास में स्नान का विशेष भाव

माघ मास की यह विशेषता बताई गई है कि इस अवधि में जहाँ कहीं भी जल उपलब्ध हो, वह गंगाजल के समान पुण्यकारी हो जाता है।

फिर भी प्रयाग, काशी, नैमिषारण्य, कुरुक्षेत्र, हरिद्वार तथा अन्य पवित्र तीर्थों और नदियों में किया गया स्नान विशेष फल देने वाला माना गया है।

माघ मास के प्रमुख स्नान पर्व (2026)

स्नान पर्व तिथि
मौनी अमावस्या स्नान रविवार, 18 जनवरी 2026
बसंत पंचमी स्नान शुक्रवार, 23 जनवरी 2026
माघ पूर्णिमा स्नान रविवार, 1 फरवरी 2026

दान और पुण्य का महत्व

शास्त्रों में माघ मास के दान की विशेष प्रशंसा की गई है। कहा गया है कि जो व्यक्ति माघ मास में ब्राह्मणों को तिल का दान करता है, वह घोर नरकों के दर्शन से मुक्त हो जाता है।

इसी प्रकार माघ पूर्णिमा के दिन धर्मग्रंथों के दान का भी विशेष महत्व बताया गया है, जिससे उत्तम लोकों की प्राप्ति कही गई है।

आध्यात्मिक संकेत

माघ मास केवल बाह्य स्नान का काल नहीं है। यह भीतर की अशुद्धियों को धोने का अवसर भी है। ठंड, संयम और नियमितता – इन तीनों के साथ किया गया साधारण आचरण मनुष्य के स्वभाव में स्थिरता लाता है।

अंत में

माघ मास हमें यह स्मरण कराता है कि पुण्य के लिए हमेशा कठिन साधन आवश्यक नहीं होते। कभी-कभी श्रद्धा के साथ किया गया सरल कर्म भी जीवन की दिशा बदल सकता है।


A Reflective Note

The month of Magh has long been regarded as a quiet yet powerful period for inner purification. Scriptural tradition suggests that even a simple act such as a mindful bath, performed with restraint and reverence during this time, can yield results greater than elaborate austerities undertaken elsewhere.

Beyond the physical act, Magh Snan invites a discipline of simplicity, regularity, and inward attention. As the body is cleansed in cold waters, the mind too is gently trained toward clarity and steadiness. In this balance of outer practice and inner reflection lies the enduring spiritual value of the Magh month.





Share this knowledge

Comments

: