ॐ हनुमंते नमः
दुनिया चले ना श्रीराम के बिना।
रामजी चले ना हनुमान के बिना॥
According to religious almanacs (panchangs) the birthday of Hanuman falls on the fourteenth day (chaturdashi) in the dark fortnight of the month of Ashvin while according to others it falls on the full moon day in the bright fortnight of Chaitra.
Hanuman Janmotsav : Thu, 2 April 2026
चैत्र सुदी पूर्णिमा के दिन ही हनुमान जयंती मनाते हैं । अंजनीको भी दशरथकी रानियोंके समान तपश्चर्याद्वारा पायस (चावलकी खीर, जो यज्ञ-प्रसादके तौरपर बांटी जाती है) प्राप्त हुई थी व उसे खानेके उपरांत ही हनुमानका जन्म हुआ था । उस दिन चैत्रपूर्णिमा थी, जो `हनुमान जयंती’/ Hanuman Janmotsav के तौरपर मनाई जाती है ।
इस दिन वाल्मीकीय रामायण अथवा तुलसीकृत श्रीरामचरितमानसके सुन्दरकाण्डका या हनुमानचालीसाके अखण्ड पाठका आयोजन करना चाहिये। हनुमान्जीका गुणगान, भजन एवं कीर्तन करना चाहिये । श्री हनुमान्जीके विग्रहका सिन्दूरसे श्रृंगार करना चाहिये । नैवेधमें गुड, भीगा चना या भुना चना तथा बेसनका लड्डू रखना चाहिये।
हनुमान : इंद्र द्वारा वज्र से प्रहार करने से उनकी हनु (ठुड्डी) टूट जाने के कारण ही उन्हें हनुमान कहा जाने लगा। प्रहार से मूर्छित हनुमान को जल छिड़ककर पुन: सचेत कर प्रत्येक देवता ने उनको अपने-अपने दिव्य अस्त्र-शस्त्र दिए जिसके कारण उनका नाम महावीर हुआ। हनुमानजी को बजरंगबली, केसरी नंदन, अंजनीपुत्र, पवनपुत्र आदि अनेक नामों से जाना जाता है।
हनुमान बुद्धि और बल के दाता हैं। उत्तरकांड में भगवान राम ने हनुमानजी को प्रज्ञा, धीर, वीर, राजनीति में निपुण आदि विशेषणों से संबोधित किया है। हनुमान बल और बुद्धि से संपन्न हैं। उनको मानसशास्त्र, राजनीति, साहित्य, तत्वज्ञान आदि शास्त्रों का गहन ज्ञान है। उन्हें ग्यारहवें व्याकरणकार और रुद्र का अवतार माना जाता है।
वे हिन्दुओं के एकमात्र देवता ऐसे हैं जो सशरीर आज भी विद्यमान हैं। मान्यता अनुसार कलयुग के अंत में ही हनुमानजी अपना शरीर छोड़ेंगे।

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