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Showing posts from May, 2016

Vat Savitri Vrat : Guarantees Marital Harmony

Beginning on the thirteenth lunar day in shuklapaksha, when the nakshatra Bhadrapada is in the sky, one fasts for three days and recounts the story of Savitri and Satyavana. (This story can be found in other Puranas and in the Mahabharata. Savitri's husband Satyavana had died. Savitri convinced Yama of her devotion and persuaded the god of death to bring her dead husband back to life) .

Newly married women visit a nearby Vat tree and worship it by tying red threads of love around it. They offer flowers and sweets to the tree. When the moon rises full and resplendent on the horizon, special feasts are shared by families.

Vat Savitri Vrat (Bad Mavas): Sat, 4 June 2016

Vat Savitri Vrat (Purnima) : Sun, 19 June 2016

वट की परिक्रमा करते समय एक सौ आठ बार या यथा शक्ति सुत लपेटा जाता है। ‘नमो वैवस्वताय’ इस मन्त्रसे वटवृक्षकी प्रदक्षिणा करनी चाहिये। सावित्रीको अर्घ्य देना चाहिये और वटवृक्षका सिंचन करते हुए अपने सौभाग्य की प्रार्थना करनी चाहिये। चने पर रुपया रखकर बायनेके रुपमें अपनी सासको देक…

वट सावित्री व्रत - सौभाग्य की वृद्धि और पतिव्रत संस्कारों का आत्मसात

स्कंद पुराण तथा भविष्योत्तर पुराण के अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को वट सावित्री व्रत करने का विधान है, वहीं निर्णयामृत आदि के अनुसार ज्येष्ठ मास की अमावस्या को यह व्रत करने की बात कही गई है। तिथियों में भिन्नता होते हुए भी व्रत का उद्देश्य एक ही है सौभाग्य की वृद्धि और पतिव्रत के संस्कारों को आत्मसात करना।

वट देव वृक्ष है। वट वृक्ष के मूल में ब्रह्मा, मध्य में विष्णु तथा अग्रभाग में शिव रहते हैं। देवी सावित्री भी वट वृक्ष में रहती हैं।

वट वृक्ष के नीचे सावित्री ने अपने पति को पुन: जीवित किया था। तब से यह व्रत ‘वट सावित्री’ के नाम से जाना जाता है। इसमें वट वृक्ष की पूजा की जाती है। महिलाएं अखण्ड सौभाग्य एवं परिवार की समृद्धि के लिए यह व्रत करती हैं। व्रत की परिक्रमा करते समय एक सौ आठ बार या यथाशक्ति सूत लपेटा जाता है। साड़ी पर रुपया रखकर बायने के रूप में सास को देकर आशीर्वाद लिया जाता है। महिलाएं सावित्री सत्यवान की कथा सुनती हैं। सावित्री की कथा को सुनने से सम्पूर्ण मनोरथ पूर्ण होते हैं और विपत्तियां दूर होती हैं।

Vat Savitri Vrat (Bad Mavas): Sat, 4 June 2016
Vat Savi…

Akshaya Tritiya (अक्षय तृतीया - आखा तीज) : Parshuram Jayanti

Shri Parshuram Jayanti : Sun, 8 May 2016
(Celebrate after 18:55 Hrs IST, 8 May)
वैशाख शुक्ल पक्ष की प्रदोष व्यापिनी तृतीया तिथि में श्रीपरशुराम जयंती मनाई जाती है | - धर्मसिन्धु
भविष्य पुराण के अनुसार वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि की रात्रि के प्रथम प्रहर (प्रदोष) में भगवान श्रीपरशुरामजी का अंशावतार हुआ था |
Aakha Teej (Akshaya Tritiya) : Monday, 9 May 2016

सूर्योदय कालीन वैशाख शुक्ल तृतीया  (Tritiya Tithi: until 14: 52 hrs, 9 May 2016)

Akshaya Muhurta - 5.40 am to  12.15 pm (9 May 2016)
Akshaya Tritiya, also known as “Akha Teej”, is traditionally the birthday of Lord Parasurama, the sixth incarnation of Lord Vishnu. People conduct special Pujas on this day, bathe in holy rivers, make a charity, offer barley in a sacred fire, and worship Lord Ganesha & Devi Lakshmi on this day.

Akshaya Tritiya marks the beginning of the Treta Yug. The birthday of Parashurama, the sixth incarnation of Vishnu falls on this day. In the “Puranas”, the holy Hindu scriptures, there is a story that says that on this d…