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Karwa Chauth Vrat - Sankalp, Vidhi, Katha and Ujman

करवा चौथ व्रत - संकल्प, विधान, कथा और उजमन
Chaturthi Tithi Start: 8:24 (30/10/2015)
Chaturthi Tithi ends: 6:25 (31/10/2015)


Karwa Chouth (Karak Chaturthi) : Fri, 30 October 2015
Karwa Chouth Puja Muhurta: 17.33 to 18.52

Moonrise Time (चंद्रोदय): 20:26 hrs 
Local Time: Delhi (India)



यह व्रत कार्तिक कृष्णकी चन्द्रोदयव्यापिनी चतुर्थीको किया जाता है । इस व्रतमें शिव-पार्वती और स्वामीकार्तिकेय और चन्द्रमाका पूजन करना चाहिये।

Karwa Chauth Vrat Sankalp :

व्रत संकल्प - ‘मम सुखसौभाग्यपुत्रपोत्रादिसुस्थिरश्रीप्राप्तये करकचतुर्थीव्रतमहं करिष्ये।’

Karwa Chauth Vidhi :

विधान - एक पट्‍टे पर जलसे भरा लोटा एवं एक करवे में गेहूं भरकर रखते हैं। दीवार पर या कागज पर चन्द्रमा उसके नीचे शिव-पार्वती तथा कार्तिकेयकी चित्रावली बनाकर पूजा की जाती है । कथा सुनते हैं। इस दिन निर्जल व्रत किया जाता है । चन्द्रमा को देखकर अर्घ्य देते हैं फिर भोजन करते हैं।

Karwa Chauth Vrat Katha - There is different version of this story, read one or all which suits you.

करवा चौथ व्रत कथा - 1
बहुत समय पहले इन्द्रप्रस्थपुर के एक शहर में वेदशर्मा नाम का एक ब्राह्मण रहता था। वेदशर्मा का विवाह लीलावती से हुआ था जिससे उसके सात महान पुत्र और वीरावती नाम की एक गुणवान पुत्री थी। क्योंकि सात भाईयों की वह केवल एक अकेली बहन थी जिसके कारण वह अपने माता-पिता के साथ-साथ अपने भाईयों की भी लाड़ली थी।

जब वह विवाह के लायक हो गयी तब उसकी शादी एक उचित ब्राह्मण युवक से हुई। शादी के बाद वीरावती जब अपने माता-पिता के यहाँ थी तब उसने अपनी भाभियों के साथ पति की लम्बी आयु के लिए करवा चौथ का व्रत रखा। करवा चौथ के व्रत के दौरान वीरावती को भूख सहन नहीं हुई और कमजोरी के कारण वह मूर्छित होकर जमीन पर गिर गई। 

सभी भाईयों से उनकी प्यारी बहन की दयनीय स्थिति सहन नहीं हो पा रही थी। वे जानते थे वीरावती जो कि एक पतिव्रता नारी है चन्द्रमा के दर्शन किये बिना भोजन ग्रहण नहीं करेगी चाहे उसके प्राण ही क्यों ना निकल जायें। सभी भाईयों ने मिलकर एक योजना बनाई जिससे उनकी बहन भोजन ग्रहण कर ले। उनमें से एक भाई कुछ दूर वट के वृक्ष पर हाथ में छलनी और दीपक लेकर चढ़ गया। जब वीरावती मूर्छित अवस्था से जागी तो उसके बाकी सभी भाईयों ने उससे कहा कि चन्द्रोदय हो गया है और उसे छत पर चन्द्रमा के दर्शन कराने ले आये। वीरावती ने कुछ दूर वट के वृक्ष पर छलनी के पीछे दीपक को देख विश्वास कर लिया कि चन्द्रमा वृक्ष के पीछे निकल आया है। अपनी भूख से व्याकुल वीरावती ने शीघ्र ही दीपक को चन्द्रमा समझ अर्घ अर्पण कर अपने व्रत को तोड़ा। वीरावती ने जब भोजन करना प्रारम्भ किया तो उसे अशुभ संकेत मिलने लगे। पहले कौर में उसे बाल मिला, दुसरें में उसे छींक आई और तीसरे कौर में उसे अपने ससुराल वालों से निमंत्रण मिला। पहली बार अपने ससुराल पहुँचने के बाद उसने अपने पति के मृत शरीर को पाया। 

अपने पति के मृत शरीर को देखकर वीरावती रोने लगी और करवा चौथ के व्रत के दौरान अपनी किसी भूल के लिए खुद को दोषी ठहराने लगी। वह विलाप करने लगी। उसका विलाप सुनकर देवी इन्द्राणी जो कि इन्द्र देवता की पत्नी है, वीरावती को सान्त्वना देने के लिए पहुँची।

वीरावती ने देवी इन्द्राणी से पूछा कि करवा चौथ के दिन ही उसके पति की मृत्यु क्यों हुई और अपने पति को जीवित करने की वह देवी इन्द्राणी से विनती करने लगी। वीरावती का दुःख देखकर देवी इन्द्राणी ने उससे कहा कि उसने चन्द्रमा को अर्घ अर्पण किये बिना ही व्रत को तोड़ा था जिसके कारण उसके पति की असामयिक मृत्यु हो गई। देवी इन्द्राणी ने वीरावती को करवा चौथ के व्रत के साथ-साथ पूरे साल में हर माह की चौथ को व्रत करने की सलाह दी और उसे आश्वासित किया कि ऐसा करने से उसका पति जीवित लौट आएगा। 

इसके बाद वीरावती सभी धार्मिक कृत्यों और मासिक उपवास को पूरे विश्वास के साथ करती। अन्त में उन सभी व्रतों से मिले पुण्य के कारण वीरावती को उसका पति पुनः प्राप्त हो गया । 

इस कथा को शिवजीने पार्वतीजी को सुनायी थी।


इसी कथा का एक अन्य स्वरुप, गणेशजी विनायकजी की कहानी और उजमन 

करवा चौथ व्रत कथा - 2

एक साहूकार के सात लड़के और एक लड़की थी । सेठानी सहित उसकी सातों बहुएं और उसकी बेटी ने भी करवा चौथ का व्रत रखा था । रात्रि के समय जब साहूकार के सभी लड़के भोजन करने बैठे तो उन्होंने अपनी बहन से भी भोजन कर लेने को कहा । इस पर बहन ने कहा- भाई, अभी चांद नहीं निकला है, चांद के निकलने पर उसे अर्घ्य देकर ही आज मैं भोजन करूंगी । अपनी बहन के उत्तर को सुनकर साहूकार के बेटे नगर के बाहर चले गए और वहां अग्नि जला दी। फिर वापस घर आकर उन्होंने छलनी से प्रकाश दिखलाते हुए अपनी बहन से बोले- देखो बहन! चांद निकल आया है. अब तुम उन्हें अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण करो। साहूकार की बेटी ने अपनी भाभियों से कहा- देखो, चांद निकल आया है, तुम लोग भी अर्घ्य देकर भोजन कर लो। ननद की बात सुनकर भाभियों ने कहा- बहन अभी चांद नहीं निकला है, तुम्हारे भाई धोखे से अग्नि जलाकर उसके प्रकाश को चांद के रूप में तुम्हें दिखा रहे हैं।

साहूकार की बेटी अपनी भाभियों की बात को अनसुनी करते हुए भाइयों द्वारा दिखाए गए चांद को अर्घ्य देकर भोजन कर लिया। इस प्रकार करवा चौथ का व्रत भंग करने के कारण विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश साहूकार की लड़की पर अप्रसन्न हो गए। गणेश जी की अप्रसन्नता के कारण उस लड़की का पति सख्त बीमार पड़ गया और घर में बचा हुआ सारा धन उसकी बीमारी में लग गया। साहूकार की बेटी को जब अपने किए हुए दोषों का पता लगा तो उसे बहुत पश्चाताप हुआ। उसने गणेश जी से क्षमा प्रार्थना की और फिर से विधि-विधान पूर्वक चतुर्थी का व्रत शुरू कर दिया। उसने उपस्थित सभी लोगों का श्रद्धानुसार आदर किया और तदुपरांत उनसे आशीर्वाद ग्रहण किया। इस प्रकार उस लड़की के श्रद्धा-भक्ति को देखकर एकदंत भगवान गणेश जी उसपर प्रसन्न हो गए और उसके पति को जीवनदान प्रदान किया। उसे सभी प्रकार के रोगों से मुक्त करके धन, संपत्ति और वैभव से युक्त कर दिया। कहते हैं इस प्रकार यदि कोई मनुष्य छल-कपट, अहंकार, लोभ, लालच को त्याग कर श्रद्धा और भक्तिभाव पूर्वक चतुर्थी का व्रत को पूर्ण करता है, तो वह जीवन में सभी प्रकार के दुखों और क्लेशों से मुक्त होता है और सुखमय जीवन व्यतीत करता है।

गणेशजी विनायकजी की कहानी

एक अंधी बुढ़िया थी, जिसका एक लड़का और बहू थी। वह बहुत गरीब थी। वह अंधी बुढ़िया नित्यप्रति गणेशजी की पूजा किया करती थी। गणेशजी साक्षात्‌ सन्मुख आकर कहते थे कि बुढ़िया माई तू जो चाहे सो मांग ले। बुढ़िया कहती मुझे मांगना नहीं आता सो कैसे और क्या मांगू। तब गणेशजी बोले कि अपने बहू-बेटे से पूछ कर मांग ले।

तब बुढ़िया ने अपने पुत्र और वधू से पूछा तो बेटा बोला कि धन मांग ले और बहू ने कहा कि पोता मांग ले। तब बुढ़िया ने सोचा कि बेटा-बहू तो अपने-अपने मतलब की बातें कर रहे हैं।

अतः उस बुढ़िया ने पड़ोसियों से पूछा तो पड़ोसियों ने कहा कि बुढ़िया तेरी थोड़ी-सी जिंदगी है। क्यों मांगे धन और पोता, तू तो केवल अपने नेत्र मांग ले, जिससे तेरी शेष जिंदगी सुख से व्यतीत हो जाए। उस बुढ़िया ने बेटे, बहू तथा पड़ोसियों की बात सुनकर घर में जाकर सोचा, जिससे बेटा-बहू और मेरा सबका ही भला हो वह भी मांग लूं और अपने मतलब की चीज भी मांग लूं।

जब दूसरे दिन गणेशजी आए और बोले, बोल बुढ़िया क्या मांगती है। हमारा वचन है जो तू मांगेगी सो ही पाएगी। गणेशजी के वचन सुनकर बुढ़िया बोली हे गणराज यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो मुझे नौ करोड़ की माया दें, निरोगी काया दें, अमर सुहाग दें, आंखों में प्रकाश दें, नाती-पोता दें और समस्त परिवार को सुख दें और अंत में मोक्ष दें।

बुढ़िया की बात सुनकर गणेशजी बोले- बुढ़िया मां तूने तो मुझे ठग लिया। खैर, जो कुछ तूने मांग लिया वह सभी तुझे मिलेगा। यूं कहकर गणेशजी अंतर्ध्यान हो गए।

हे गणेशजी जैसे बुढ़िया मां को मांगे अनुसार आपने सब कुछ दिया है, वैसे ही सबको देना और हमको भी देने की कृपा करना।

करवा चौथ का उजमन (Ujman)
उजमन करने के लिये एक थाली में तेरह जगह चार-चार पूडी और थोडा-सा सीरा रख लें। उसके ऊपर एक साडी ब्लाउज और रुपये जितना चाहिये रख लें उस थाली के चारों ओर रोली, चावल से हाथ फेर कर अपनी सासू जी के पांव लगकर उन्हें दे देवें।

उसके बाद तेरह ब्राह्मणों को भोजन करावें और दक्षिणा देकर तथा बिन्दी (तिलक) लगाकर उन्हें विदा करें ।

Listen Karwa Chauth Vrat Katha Audio






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To Grand Father Replace AsmatPita with Asmatpitamah Replace Vasuroopastripyatamidam with Rudraroopastripyatamidam Replace AmukSharma with Grand Father’s Name

Durga Puja Samagri (Items) - Checklist

Durga Puja Samagri List

1. Deity (statue/photo), Chunari, Shringaar items 
2. Two big lamps (with wicks, oil/ghee), 
3. Matchbox, Agarbatti 
4. Karpoor, Gandha Powder, Kumkum, gopichandan, haldi 
5. Sri Mudra (for Sandhyaavandan), Vessel for Tirtha, Yajnopavita , Roli, Moli(Kaleva)
6. Puja Conchshell, Bell, One aarati (for Karpoor), Two Aaratis with wicks
7. Flowers, Akshata (in a container), tulsi leaves
8. Decorated Copper or Silver or other Kalasha, Two pieces of red cloth (new),
9. Coconut, 1/2 kg. Rice, Bananas 6, gold coin, gold chain
10. Extra Kalasha, 3 trays, 3 vessels for Abhisheka 
11. Beetlenuts 6, Beetlenut Leaves 12, Banana Leaves 2, Mango Leaves 5-25
12. Dry Fruits, 5 bananas, 1 coconut - all for naivedya
13. Panchaamrita - Milk, Curd, Honey, Ghee, Sugar, Ganga Jal 
14. Puja Book,containing Aarti, Stotra, Chalisa, Stuti etc. 
15. Red flowers and red flower malas.
16. Also fruits and prasad as far as possible 21 varieties.
For more details consult your priest/purohit.

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* Delhi, India Local Time (IST)
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