Chhath Puja - Surya Shashthi Vrat

by 11/03/2016 0 comments
छठ पूजा - सूर्य षष्ठी

Chhath Puja (Chhathi Maiya Pujan)
Surya Shashthi Vrat : Sun, 6 November 2016

कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी को सूर्य षष्ठी का व्रत करने का विधान है । इसे करने वाली स्त्रियाँ धन-धान्य, पति-पुत्र तथा सुख-समृद्धि से परिपूर्ण रहती हैं। यह व्रत बडे नियम तथा निष्ठा से किया जाता है। इसमे तीन दिन के कठोर उपवास का विधान है । इस व्रत को करने वाली स्त्रियों को पंचमी को एक बार नमक रहित भोजन करना पडता है। षष्ठी को निर्जल रहकर व्रत करना पडता है । षष्ठी को अस्त होते हुए सूर्य को विधिपूर्वक पूजा करके अर्घ्य देते हैं। सप्तमी के दिन प्रात:काल नदी या तालाब पर जाकर स्नान करती हैं। सूर्योदय होते ही अर्घ्य देकर जल ग्रहण करके व्रत को खोलती हैं।

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सूर्यषष्ठी-व्रतके अवसरपर सायंकालीन प्रथम अर्घ्यसे पूर्व मिट्टीकी प्रतिमा बनाकर षष्ठीदेवीका आवाहन एवं पूजन करते हैं। पुनः प्रातः अर्घ्यके पूर्व षष्ठीदेवीका पूजन कर विसर्जन कर देते हैं। मान्यता है कि पंचमीके सायंकालसे ही घरमें भगवती षष्ठीका आगमन हो जाता है। इस प्रकार भगवान्‌ सूर्यके इस पावन व्रतमें शक्ति और ब्रह्म दोनोंकी उपासनाका फल एक साथ प्राप्त होता है । इसीलिये लोकमें यह पर्व ‘सूर्यषष्ठी’ के नामसे विख्यात है।

सूर्यषष्ठी-व्रतके प्रसादमें ऋतु-फलके अतिरिक्त आटे और गुडसे शुद्ध घीमें बने ‘ठेकुआ’ का होना अनिवार्य है; ठेकुआपर लकडीके साँचेसे सूर्यभगवान्‌के रथका चक्र भी अंकित करना आवश्यक माना जाता है। इस व्रत का प्रसाद माँगकर खानेका विधान है।

Ajay Govind

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My profile has nothing great to write but I have blessings of Lord Ganesha, Maa Saraswati, Guru Bhagwan and Lord Sri HariHar.

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